कांग्रेस संसदीय दल की नेता और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिय गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला खदान के आवंटन में कथित घोटाला को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से मिली क्लीन चिट को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सही ठहराने के बाद पहली बार अपने मन की बात की है। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में एक आलेख लिखकर सोनिया गांधी ने कहा कि इतिहास मनमोहन सिंह को निश्चित रूप से उदारता के साथ एक शांत और सज्जन लेकिन सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री के तौर पर याद रखेगा। सोनिया ने लेख में मनमोहन सरकार के 10 साल को असरदार बताया और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। मनमोहन सिंह ने बतौर PM अपने अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में 3 जनवरी 2014 को मीडिया के सवाल के जवाब में कहा था- ‘मुझे पूरा विश्वास है कि समकालीन मीडिया या फिर संसद में मौजूदा विपक्षी पार्टियां की तुलना में इतिहास मेरे प्रति कहीं अधिक उदार रहेगा।’
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के कार्यकाल की उपलब्धियों और कुछ ऐतिहासिक पहल की संक्षित चर्चा करते हुए मनमोहन सिंह को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की है, जिससे लगता है कि उन्हें पीएम मोदी की वह बात अखर गई। सोनिया लिखती हैं- ‘यह संयोग नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनमोहन सिंह पर हमले के मुखर पैरोकारों में शामिल थे। 8 फरवरी 2017 को राज्यसभा में उनकी कटु टिप्पणी और क्रूर बयान- सिर्फ मनमोहन सिंह को पता है कि रेनकोट पहनकर कैसे नहाया जाता है- हमारे संसदीय इतिहास के सबसे निचले स्तर के रूप में याद किया जाएगा।’
मनमोहन सिंह को सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में याद रखेगा इतिहास: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने हालिया छात्र आंदोलन में शामिल जेन-जी नौजवानों की भाषा और लहजे को लेकर पीएम मोदी के बयान की ओर इशारा करते हुए लिखा- ‘चूंकि मोदी आजकल अपने ऊपर हमले को लेकर भारत के छात्रों को माफ कर रहे हैं, तो शायद इस मौके पर वो मनमोहन सिंह को अमर्यादित तरीके से बदनाम करने के लिए खुद को माफ कर सकते हैं।’ सोनिया गांधी ने लिखा है कि मनमोहन सिंह सरकार के शानदार काम से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री को निशाना बनाया गया था। सोनिया ने 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान भी भारत की अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने की याद दिलाते हुए कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना के तौर-तरीके बदलने के बाद भी मोदी सरकार के 12 साल की तुलना में मनमोहन सरकार के 10 साल के दौरान आर्थिक विकास की दर बेहतर थी। उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों से करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए।
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