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उत्तर प्रदेश के वाराणसी के दालमंडी इलाके में बुधवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली. यहां चौड़ीकरण के दायरे में आने वाली 6 मस्जिदों में से 5 मस्जिदों को तोड़ने का काम शुरू हो गया. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन मस्जिदों से जुड़े लोग खुद ही मजदूरों के साथ मिलकर तोड़फोड़ करते नजर आए.
दरअसल वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचने के लिए एक नया और वैकल्पिक रास्ता बनाया जा रहा है. इस काम के लिए मुस्लिम बहुल इलाके दालमंडी में पिछले 8 महीने से चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इस चौड़ीकरण में कुल 187 इमारतें आती हैं. इनमें से 6 मस्जिदें भी शामिल हैं. बीते 8 महीनों में अब तक 162 इमारतों पर तोड़फोड़ का काम हो चुका है. इनमें से करीब 70 इमारतों को पूरी तरह गिरा भी दिया गया है.
बुधवार सुबह होते ही 6 में से 5 मस्जिदों को तोड़ने का काम शुरू हुआ. ये पांच मस्जिदें हैं मिर्जा करीमुल्लाह बेग मस्जिद, संगेमरमर मस्जिद, अली रज़ा खान मस्जिद, निसारन मस्जिद और रंगीले शाह मस्जिद.
सुबह से ही इन सभी मस्जिदों पर मजदूर पहुंच गए और हाथों से मस्जिद के आगे वाले हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया. जो बात इसे खास बनाती है वह यह है कि मस्जिद से जुड़े लोग खुद इस काम में मजदूरों की मदद करते दिखे. यानी यह तोड़फोड़ जबरदस्ती नहीं बल्कि आपसी सहमति से हुई.
अब सवाल उठता है कि यह सहमति कैसे बनी? दरअसल यह सभी पांचों मस्जिदें वक्फ की संपत्ति हैं. इन मस्जिदों को तोड़ने से पहले प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच आपसी बातचीत हुई. इसके बाद क्षतिपूर्ति यानी नुकसान की भरपाई पर सहमति बनी और तब जाकर यह कार्रवाई शुरू हो सकी.
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इससे करीब 2 हफ्ते पहले ही इन सभी मस्जिदों की नापी का काम भी पूरा हो चुका था, जिससे यह साफ हो गया था कि कितना हिस्सा टूटेगा.
अगर बात करें कि किस मस्जिद का कितना हिस्सा टूटेगा, तो सबसे ज्यादा नुकसान अली रजा खान मस्जिद को होने वाला है. बताया जा रहा है कि इस मस्जिद का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा चौड़ीकरण की जद में आ जाएगा और मस्जिद का सिर्फ 5 फीट हिस्सा ही बच पाएगा. वहीं बाकी बची चार मस्जिदों का सिर्फ आंशिक यानी थोड़ा-थोड़ा हिस्सा ही तोड़ा जाएगा.
अब बात करते हैं छठी मस्जिद की, जिसका नाम है लंगड़ा हाफिज मस्जिद. यह मस्जिद दालमंडी के आखिरी छोर पर नई सड़क इलाके में स्थित है. इस मस्जिद का मामला अभी कोर्ट में चल रहा है और मस्जिद कमेटी के साथ अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है. यही वजह है कि आज की कार्रवाई में इस मस्जिद को शामिल नहीं किया गया.
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह पूरा मामला बाबा काशी विश्वनाथ धाम तक जाने वाले रास्ते को चौड़ा करने से जुड़ा है, जिसमें प्रशासन और मस्जिद कमेटियों के बीच बातचीत के बाद सहमति से मस्जिदों को तोड़ने का काम शुरू हुआ है. एक मस्जिद का मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ है, जिस पर आगे फैसला आना बाकी है.
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