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हिमाचल प्रदेश के मंडी से सटे बालीचौकी-बंजार क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति के एक मादा बारहसिंगा के शिकार का मामला सामने आया है. शिकारी से जान बचाने के लिए बारहसिंगा ने तीर्थन नदी में छलांग लगा दी. ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर रेस्क्यू तो किया, लेकिन गंभीर हालत के चलते उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
जानकारी के मुताबिक, बालीचौकी और बंजार क्षेत्र की सीमा पर बीते दिन देर शाम ग्रामीणों ने एक घायल मादा बारहसिंगा को तीर्थन नदी के किनारे भागते देखा. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जान बचाने की कोशिश में वह सीधे नदी में कूद गई थी. स्थानीय लोगों ने तुरंत पशुपालन विभाग और वन विभाग को सूचना दी.
मौके पर पहुंची टीम ने ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. पंचायत मंगलौर से जुड़े कर्मचारी भूपेंद्र शर्मा ने नदी में उतरकर बारहसिंगा को बाहर निकाला. इसके बाद उसे वन विभाग बंजार की टीम को सौंप दिया गया.
रेस्क्यू के समय बारहसिंगा बुरी तरह सहमी हुई और घायल हालत में थी. उसके शरीर पर कई जगह चोट के निशान दिखाई दिए. जांच में आशंका जताई गई कि उसे छर्रे लगे हो सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मादा बारहसिंगा दुर्लभ प्रजाति की थी और करीब दो महीने पहले थाची क्षेत्र के आसपास भी देखी गई थी. हाल के दिनों में इसकी मूवमेंट लगभग 10 किलोमीटर दूर भूराह क्षेत्र की तरफ दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजाति का इस इलाके में दिखना अपने आप में महत्वपूर्ण था.
रेस्क्यू के बाद बारहसिंगा को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही. तमाम कोशिशों के बावजूद बीती रात इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके.
घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घायल बारहसिंगा और रेस्क्यू के दृश्य दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद अवैध शिकार की आशंका और गहरा गई है.
घटना को लेकर डीएफओ ने क्या कहा?
वन मंडल बंजार के डीएफओ मनोज कुमार ने बताया कि बारहसिंगा के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं. छर्रे लगने की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि अवैध शिकार की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि जिस समय बारहसिंगा को देखा गया, उस दौरान उसके साथ एक नन्हा हिरन भी मौजूद था. हालांकि रेस्क्यू के दौरान वह नजर नहीं आया और अब तक उसका कोई सुराग नहीं लग सका है.
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाएं वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरा हैं. दुर्लभ प्रजातियों की संख्या पहले ही सीमित है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंताजनक हैं.
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