भारत ने बांग्लादेश बॉर्डर पर बाड़बंदी क्या शुरू की, मुहम्मद युनूस की सरकार टेंशन में आ गई. उन्होंने हमारे राजदूत को बुलाकर इसे रोकने की मांग की. लेकिन जवाब भारत ने भी दिया. विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के टॉप डिप्लोमैट नूर-अल-इस्लाम को तलब किया और उन्हें बताया कि भारत ने बाड़बंदी का फैसला क्यों किया. उन्हें बताया कि बांग्लादेश से किस तरह हजारों लोग भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं. कई तो घुस भी गए, जिन्हें पकड़ा गया. यहां तक कि शेख हसीना के एक नेता की लाश तक बहकर आ गई.
विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त को साफ-साफ बता दिया कि बाड़ लगाने में सभी समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन किया गया है. हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश इसे समझेगा. सीमा पार से आपराधिक गतिविधियां होती थीं. तस्करी की जाती थी. अपराधी क्राइम करके भाग आते थे और फिर भारत में क्राइम करते थे. इन सब चीजों से निपटने के लिए बाड़बंदी जरूरी थी. भारत सरकार ऐसी चीजों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए जो भी कदम उठाने होंगे, उठाए जाएंगे.
भारत का कड़ा संदेश
भारत ने नूर-अल-इस्लाम को बता दिया कि कंटीले तारों की बाड़ लगाना, सीमा पर लाइट की व्यवस्था करना, तकनीकी उपकरण लगाना और जानवरों का प्रवेश रोकने के लिए इंतजाम करना जारी रखा जाएगा. भारत ने आशा जताई कि बांग्लादेश भी पहले के समझौतों और प्रोटोकॉल को लागू करेगा और सीमा पार से हो रहे अपराधों पर लगाम लगाएगा. भारत ने बांग्लादेश को कड़ा संदेश भेजा है और साफ कर दिया है कि सुरक्षा के लिहाज से जो भी कदम जरूरी होंगे, उठाया जाएगा.
नेता-कार्यकर्ता भगकर आ रहे थे
भारत ने उन्हें बताया कि क्यों इस तरह का फैसला लेना पड़ा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि बॉर्डर पर कई जगह से अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय क्षेत्रों में प्रवेश करने की कोशिश करते देखा गया. इसके बारे में पहले भी बांग्लादेश को जानकारी दी गई थी. पिछले साल अगस्त में तो शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के नेता इश्फाक अली खान पन्ना का शव मेघालय के अंदर भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब मिला था. संदेह यह था कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने उनका पीछा किया और उनकी हत्या कर दी.