नई दिल्ली, एजेंसी। शोध विश्लेषकों के लिए संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग रखना अब अनिवार्य नहीं होगा। बाजार नियामक सेबी ने अनुपालन का बोझ घटाने और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने के लिए यह राहत दी है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को जारी एक परिपत्र में कहा कि शोध विश्लेषकों और संबंधित संस्थाओं को अब संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से रखने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उन्हें संभावित ग्राहकों सहित सभी ग्राहकों के साथ बातचीत का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके लिए ग्राहक के हस्ताक्षर वाले लिखित दस्तावेज, ईमेल, एसएमएस, कॉल रिकॉर्डिंग या किसी अन्य कानूनी रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है।सेबी
ने कहा कि इन रिकॉर्ड को पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा। किसी विवाद की स्थिति में उसके निपटारे तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे। नियामक के निर्देश पर विशिष्ट रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखना होगा। सेबी ने स्पष्ट किया कि ईमेल जैसे माध्यमों से बातचीत होने पर कॉल रिकॉर्डिंग की जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसे माध्यमों में डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।
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