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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि सनातन संस्कृति भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि समय के साथ परिस्थितियाँ बदलती रही हैं, परंतु भारत के सभ्यतागत मूल्य आज भी संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं तथा शांति, सद्भाव और नैतिक जीवन को बढ़ावा देने में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं।
ओम बिरला ने ये विचार श्री रघुवंशपुरम आश्रम स्थित श्री अर्धनारीश्वर मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्रीराम कथा समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव भारत की आध्यात्मिक परंपराओं, संत संस्कृति और लोक कल्याण की भावना का प्रेरणादायी उत्सव है। बिरला ने कहा कि भगवान अर्धनारीश्वर की प्राण-प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था को सुदृढ़ करने, जीवन-मूल्यों को मजबूत करने और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का पावन अवसर है। बिरला ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और राष्ट्र निर्माण में सामूहिक सहभागिता की प्रेरणा देते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर केवल श्रद्धा और आस्था के केंद्र ही नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, संस्कार, सेवा और सामाजिक समरसता के संवाहक भी हैं। बिरला ने कहा कि मंदिर भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा समाज के नैतिक आधार को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।बिरला ने यह भी कहा कि प्राचीन काल से ही मंदिर शिक्षा, दान और जनकल्याण के केंद्र रहे हैं और उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को निरंतर पोषित किया है।
भगवान अर्धनारीश्वर के महत्व का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि उनका दिव्य स्वरूप शिव और शक्ति, पुरुष और प्रकृति के समन्वित एवं संतुलित स्वरूप का प्रतीक है।बिरला ने कहा कि भगवान शिव का लोक कल्याण का संकल्प और माता पार्वती की करुणा समाज को संतुलित, समरस और संवेदनशील जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि यह संतुलन हमें प्रकृति और मानवता दोनों के प्रति सम्मान का संदेश देता है और सतत एवं समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि भगवान राम धर्म, कर्तव्य और लोक कल्याण के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक हैं।बिरला ने कहा कि श्रीराम कथा लोगों को इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण कर प्रत्येक नागरिक सशक्त, संस्कारित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
ओम बिरला ने कहा कि श्री रघुवंशपुरम आश्रम, केशव प्रिया गौशाला, श्री अर्धनारीश्वर मंदिर और श्रीराम कथा भारतीय संस्कृति के ऐसे महत्वपूर्ण केंद्र हैं, जो सेवा, सदाचार, गौ-संरक्षण और मानवता के मूल्यों को निरंतर सशक्त बना रहे हैं। बिरला ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा का वास्तविक संदेश केवल मंदिर में देवप्रतिमा की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने जीवन में सत्य, सेवा, करुणा और संस्कारों की प्रतिष्ठा करना भी है।बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक मजबूत करेंगे।
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