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नई दिल्ली। यूट्यूब चैनल 4PM News को ब्लॉक किए जाने के मामले में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार ने अदालत में दायर हलफनामे में कहा है कि चैनल “एंटी-इंडिया भावनाएं फैलाने” और “डिजिटल लॉबिंग” में शामिल था, जिसके चलते उसे मार्च में ब्लॉक करने का फैसला लिया गया।
केंद्र सरकार के अनुसार, 4PM News का कंटेंट एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा था, जिसमें “स्पेकुलेटिव, एकतरफा, दुर्भावनापूर्ण और अप्रमाणित” सामग्री प्रसारित की जा रही थी। हलफनामे में कहा गया है कि चैनल पर ऐसे वीडियो डाले गए, जिनमें भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए, जैसे देश की रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करना, पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों की पूर्व जानकारी होना और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डालना।
सरकार ने यह भी कहा कि चैनल ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए आतंकी हमले को लेकर भी भ्रामक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और 17 अन्य घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार, आतंकियों ने पर्यटकों को धर्म पूछकर निशाना बनाया था। केंद्र का आरोप है कि चैनल ने इस हमले में भारत की सैन्य कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और ऐसे नैरेटिव पेश किए, जिससे सशस्त्र बलों पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 4PM News एक “डिजिटल इको चैंबर” की तरह काम करता है, जहां एक ही तरह का कंटेंट बार-बार दिखाकर जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। सरकार के मुताबिक, चैनल का कंटेंट देश की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक पाया गया, जो आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कार्रवाई के दायरे में आता है।
केंद्र सरकार ने 12 मार्च को इसी धारा के तहत चैनल को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। वहीं, 4PM News और उसके एडिटर संजय शर्मा ने इस कार्रवाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि न तो यूट्यूब और न ही सरकार की ओर से उन्हें ब्लॉक करने का कोई औपचारिक आदेश या स्पष्ट कारण उपलब्ध कराया गया। उन्होंने इसे सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग पर कार्रवाई बताया है।
इस मामले में अब दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे सुनवाई होगी।
देश विरोधी नैरेटिव का लेबल लगाकर 4PM को बंद करना दरअसल सच से डर का सबसे बड़ा सबूत है.
अगर सरकार को अपने तर्कों पर भरोसा होता, तो वो अदालत में और जनता के बीच बहस करती, न कि प्लेटफॉर्म पर ताला लगाती.
आज 4PM है, कल कोई और होगा, यह सिर्फ एक चैनल की लड़ाई नहीं, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला है.
जब सवाल पूछना “खतरा” और सत्ता की आलोचना “देश विरोध” बना दी जाए, तो समझ लीजिए लोकतंत्र खतरे में है.
आवाज़ें बंद करने से सच नहीं रुकता, बल्कि और ज़्यादा गूंजता है.
कल इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई है ! संजय शर्मा, एडिटर इन चीफ, 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
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