दुनिया में इन दिनों शत्रु देशों के बीच टकराव दिनों दिन बढ़ रहा है. बदलते दौर में लड़ाई का दायरा भी बदला है. अब दुश्मन पारंपरिक हथियारों की बजाए एयरस्पेस, साइबर स्पेस, एआई, ड्रोन जैसी तकनीकों के आधार पर अपने दुश्मन पर धावा बोलकर उसे कमजोर करता है. इन दिनों ईरान की अमेरिका और इजरायल से लड़ाई चल रही है. बीते कई साल से रूस और यूक्रेन में संघर्ष चल रहा है. भारत और पाकिस्तान में भी पिछले साल सैन्य संघर्ष हुआ था. ऐसे में युद्ध कब किसके घर में ठहर जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है.
अब जिस तेजी से हथियारों की तकनीक और आकार-प्रकार बदल रहा है. उसके लिए तेजी से रिसर्च की दरकार है. भारत में डिफेंस सेक्टर में रक्षा और रिसर्च का काम रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) करता है. यह सरकार के अधीन आता है और ऐसे में अकसर उसके सामने यह चुनौती आती है कि अगर वह रिसर्च के किसी मिशन को तेजी से अंजाम भी देना चाहे तो सरकारी तंत्र का धीमापन उसे जरूरी मंजूरी देने में समय लगा देत हैं. ऐसे में समय पर रक्षा उपकरण बनकर तैयार नहीं हो पाते.
इन्फोग्राफ- Ai Gemini से
अब भारत सरकार इस क्षेत्र में कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है. केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व में सरकार बनने के बाद डिफेंस सेक्टर को लगातार मजबूत बनाने का काम किया है. देश की सेना को मजबूत करने के लिए सरकार अब विदेशी हथियारों और तकनीक पर निर्भर रहने की बजाए स्वदेशी हथियारों पर निर्भरता बढ़ाना चाहती है. इस कड़ी में केंद्र सरकार ने DRDO को पहले से कहीं ज्यादा वित्तीय अधिकार देने का फैसला किया है.
सरकार ने डीआरडीओ को वित्तीय स्वायत्तता दी है. अब वैज्ञानिकों और लैब डायरेक्टर्स को छोटे खर्चों या शुरुआती रिसर्च के लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, वे खुद फैसले ले सकेंगे.
आज के दौर में युद्धों के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं. ऐसे में तेजी से आधुनिक हथियारों के निर्माण में चुनौतियां आती थीं. अब DRDO को इस आजादी से यह फिजूल का समय बर्बाद नहीं होगा.
DRDO को मिली इस वित्तीय स्वायत्तता से अब वह रक्षा क्षेत्र में काम कर रहीं प्राइवेट कंपनियों, शिक्षण संस्थान जैसे आईआईटी, डिफेंस स्टार्टअप्स के साथ अपने स्तर पर ही फंड शेयर कर सकेगा. इससे संबंधित प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से हो पाएगा.
भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में विदेशी तकनीकों पर कम से कम निर्भर रहना चाहती है. वह स्वदेशी हथियार बनाना और उन पर निर्भर होना चाहती है.
अब भारत इन हथियारों के वैश्विक बाजार में दुनिया के दूसरे देशों को भी बेचना चाहता है. ऐसे में DRDO को यह आजादी देकर वह इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार (29 जून 2026) को नई दिल्ली में डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स टू डीआरडीओ (DFP-2026) जारी कर इसकी शुरुआत कर दी है. यह ढांचा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग पर लागू होगा.
इस पहल का मकसद रिसर्च प्रोग्राम की मंजूरी प्रक्रिया को आसान, निर्णय लेने की गति बढ़ाना और स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा देना है. सरकार के इस फैसले के बाद अब DRDO को नए हथियारों से संबंधित प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए उन फाइलों को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे. अब किसी प्रोजेक्ट से जुड़े निचले स्तर के अधिकारी और लैब डायरेक्टर भी अपने स्तर पर फैसले ले सकेंगे. इससे सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के मिशन को मजबूत करना चाहती है.
इन्फोग्राफ- Ai Gemini से
DRDO जैसे संस्थान को इस वित्तीय आजादी देने का मतलब है कि सरकार सत्ता या शक्ति का विकेंद्रीकरण पर जोर दे रही है और वह चाहती है कि रिचर्स के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को यह छूट देना जरूरी है. किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले जो ‘प्री-प्रोजेक्ट’ रिसर्च या टेस्टिंग होती है. उसके लिए अब अलग से फंड का प्रावधान किया गया है. इसके लिए अब लंबी मंजूरियों का इंतजार नहीं करना होगा. इन नए नियमों के बाद DRDO अब प्राइवेट कंपनियों, छोटे स्टार्टअप्स और अकैडमिक संस्थानों (जैसे IITs) के साथ मिलकर ज्यादा आसानी से और बिना किसी देरी के फंड शेयर कर सकेगा.
आज के दौर में युद्धों के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं. अब लड़ाई सिर्फ जमीन या आसमान की नहीं बल्कि ड्रोन, एआई, साइबर स्पेस, मिसाइल, बॉम्बर विमान, कम्यूनिकेशनल और रडार सिस्टम पर निर्भर हो रही है. तकनीक के इस दौर में अगर हमने उपकरण विकसित करने में सयम लगाया तो हम पिछड़ जाएंगे, जिससे देश और सेना को नुकसान हो सकता है. अगर आज के दौर में भी सब कुछ लाल फीताशाही के हिसाब से चलता रहा तो धीमी गति से बनकर तैयार होने वाले रक्षा उपकरण आने से पहले ही आउटडेटिड यानी पुराने हो सकते हैं.
ऐसे में किसी प्रोजेक्ट से जुडे अधिकारी जब बजट, फंड और दूसरे जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखकर खुद ही फैसला लेंगे तो उनको सरकारी कामों में होने वाली देरी का इंतजार नहीं करना होगा. ऐसे में अधिकारियों और रिसर्च टीम का पूरा ध्यान इनोवेशन पर होगा. इस वित्तीय आजादी के देश को कई फायदे होंगे. डिफेंस सेक्टर में काम कर रहे वैज्ञानिक बिना समय गंवाए टेस्टिंग के लिए कच्चा माल और उपकरण समय पर खरीद सकेंगे, जिससे हथियारों के शुरुआती मॉडल (Prototypes) जल्दी तैयार होंगे.
भारत के डिफेंस स्टार्टअप्स बहुत तेजी से काम कर रहे हैं. DRDO के पास पैसे खर्च करने की स्वायत्तता होगी, तो वह इन स्टार्टअप्स को जल्दी फंड जारी कर सकेगा, जिससे नई तकनीक तेजी से सामने आएगी. इससे हथियारों के प्रोडक्शन तक का समय आधा हो सकता है. इसका सीधा फायदा हमारी थलसेना, नौसेना और वायुसेना को होगा, जिन्हें समय पर आधुनिक हथियार मिल सकेंगे.
इससे पहले बजट और मंजूरी को लेकर सरकारी तंत्र की धीमे रवैये के चलते कई प्रोजेक्ट तय समय से लंबी देरी के बाद बनकर तैयार हुए. इस कड़ी में तेजस और अर्जुन टैंक को ही ले लीजिए. ये अपनी डेडलाइन से काफी देरी से बनकर तैयार हुए. यह सही है कि किसी तकनीक को विकसित करने और उसे अलग-अलग परिस्थितियों में परखने में समय लगता ही है और लगना भी चाहिए. लेकिन इस फैसले से कागजी कार्रवाई और मंजूरी को लेकर जो अतिरिक्त समय लगता था उस समस को कम किया जा सकता है.
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नमस्कार! मैं अरुण कुमार, फिलहाल India.com (Zee Media) में सीनियर सब एडिटर के रूप में स्पोर्ट्स डेस्क पर कार्यरत हूं. मैं पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं और … और पढ़ें
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