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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समय सीमा बढ़ाने की मांग के मामले पर सुनवाई टल गई है. अब सुप्रीम कोर्ट मंगलवार 3 फरवरी को इस मामले की सुनवाई करेगा.
वकील कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से SIR प्रक्रिया के मामूली कारणों से नोटिस भेजे जाने पर पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि राज्य में जो हुआ है, वो कहीं ज्यादा गंभीर है. कपिल सिब्बल ने दावा किया कि तमिलनाडु में भी SIR को लेकर पश्चिम बंगाल जैसी ही स्थिति है.
कपिल सिब्बल ने सुनवाई सोमवार तक टालने की मांग की, ताकि इस बीच सरकार से निर्देश लिए जा सकें. तमिलनाडु में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई गुरुवार (29 जनवरी) तक टल गई.
लाखों वोटर्स को मामूली कारणों से नोटिस भेजने का दावा
तमिलनाडु को लेकर कपिल सिब्बल ने कहा कि वहां भी लाखों वोटर्स को मामूली कारणों से नोटिस भेजे गए हैं. उन्होंने बताया कि SIR पर आपत्ति और दावा करने की समय सीमा 29 जनवरी है. लेकिन करीब 88 लाख लोगों को अब तक कोई नोटिस नहीं मिला है. जबकि उनके नाम काटे जाने वाली सूची में हैं.
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सीजेआई ने क्या कहा?
CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘पिछली सुनवाई के दौरान हमने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट मे छूट गए लोगों को मौका देने को सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं.’ कपिल सिब्बल ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की बेंच से कहा कि याचिका में रखी गई समय सीमा को बढ़ाने की मांग का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.
वकील ने कहा कि SIR मामले में नोटिस दिए जाने हैं, हर दिन आपत्तियों पर 9 लाख सुनवाई होनी है. लेकिन अब तक सिर्फ 1 लाख सुनवाई हुई हैं.
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EC ने पश्चिम बंगाल सरकार की मांग पर विरोध जताया
इस दौरान चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने पश्चिम बंगाल सरकार की मांग का विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि इनका मकसद अर्जी डालते रहना है ताकि समय आगे बढ़ाते रहें. इसपर CJI ने कहा, हम अभी समय आगे नहीं बढ़ाएंगे, नहीं तो ये सिस्टम का मजाक बन जाएगा.
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