इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दस जुलाई से चल रहा छात्रों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। इस बीच इलाहाबाद विश्विविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) भी इस मुद्दे पर मुखर हो गया है। छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम रक्त से पत्र लिखकर इविवि में स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों में की गई सीट कटौती, प्रतिवर्ष हो रही दस प्रतिशत फीस वृद्धि, केंद्रीय पुस्तकालय को 24 घंटे सातों दिन खोलने तथा छात्रसंघ पर प्रतिबंध की जानकारी भेजी। पांच छात्रों ने अपना खून निकलवाया और उसी से पत्र लिखा। छात्रनेता प्रियांशु विद्रोही ने कहा कि विश्वविद्यालय को बचाने के लिए खून की एक-एक बूंद भी देनी पड़ी तो देंगे। छात्रों ने कुलपति को हटाने की भी मांग की है। इस दौरान अनुराग यादव, गौरव गोंड, आशुतोष मौर्य, ऋषि, मंदीप, अश्वनी, आयुष, अंश यादव, दीपांशु यादव आदि मौजूद रहे।
सीट कटौती और फीसवृद्धि पर इलाहाबाद विश्विविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) के अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह ने कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव को पत्र लिखा है। प्रो. सिंह ने लिखा है कि पिछले तीन सत्रों से इविवि में प्रवेश की सीटें को लगातार घटाया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बिना सामान्य वर्ग की सीटों को कम किए पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। उसी के तहत विश्वविद्यालय में 54 प्रतिशत सीट बढ़ाई गई थी और लगभग डेढ़ गुना शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पदों में वृद्धि की गई थी। इसके बाद सीटों में कटौती करना सामान्य, ओबीसी, एससी और एसटी समेत सभी वर्गों के विद्यार्थियों के अवसरों को घटाता है। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है। प्रो. सिंह ने कहा कि 2024-25 सत्र में स्नातक और परास्नातक की कुल सीटें 26 हजार से अधिक थीं जो घटकर लगभग 18 हजार रह गई हैं। यही नहीं तीन-चार सत्रों से फीस में कई गुना वृद्धि से सामान्य और निम्न आय वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है। प्रो. सिंह ने कुलपति से इन विषयों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग की है।
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