सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) में ‘आपातकाल के 51 वर्ष’ विषय पर एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐतिहासिक अनुभवों से सीख लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करना था। वक्ताओं ने वर्ष 1975 के आपातकाल को भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने सामूहिक रूप से शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से अतीत का गंभीर अध्ययन करने तथा किसी भी प्रकार की अधिनायकवादी मानसिकता के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया। चर्चा का एक प्रमुख विषय भारतीय लोकतंत्र की गहरी जड़ें थीं। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि लोकतांत्रिक मूल्य कोई विदेशी अवधारणा नहीं हैं, बल्कि भारतीय परंपरा का अभिन्न और प्राचीन हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि सामूहिक निर्णय-निर्माण और विचार-विमर्श की परंपरा भारत में प्राचीन काल से ही विद्यमान रही है। कार्यक्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन कुमार मिश्रा, कुलानुशासक एवं सामाजिक विज्ञान एवं नीति अध्ययन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रणव कुमार, विधि एवं शासन विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. अशोक कुमार, डॉ. पवन कुमार सिंह एवं राजनीति अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन सीयूएसबी के शैक्षणिक समुदाय द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और उन्हें सुदृढ़ बनाए रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
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