सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता शुभम अवस्थी की याचिका पर लिया संज्ञान, पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित हेलीकॉप्टर संचालन की मांग – News24 Hindi

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नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अधिवक्ता शुभम अवस्थी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लिया है, जिसमें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन को लेकर तत्काल सुरक्षा सुधार की मांग की गई है। जून 2025 में हुए एक बड़े हादसे में 11 लोगों की मौत के बाद यह याचिका दायर की गई, जिसमें पर्वतीय इलाकों के लिए विशेष SOPs, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और खराब मौसम में उड़ानों पर रोक जैसे कदम उठाने की अपील की गई है। यह मामला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष आया।
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय नूली ने अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि विमानन नियामक संरचना में गंभीर खामियां हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकारें और DGCA विफल रही हैं।
याचिका में मुख्य चिंताएं और मांगें
याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए कोई ठोस नियामक व्यवस्था नहीं है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
पर्वतीय उड़ानों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) का निर्माण।
नियमों का पालन न करने वाले ऑपरेटरों के नाम सार्वजनिक करना और उनके परमिट निलंबित करना।
ऑडिट रिपोर्ट, मौसम संबंधी रिकॉर्ड, पायलट का पुनःप्रमाणीकरण और पेलोड जानकारी सार्वजनिक करना।
रियल-टाइम फ्लाइट ट्रैकिंग के लिए केंद्रीय नियंत्रण केंद्र की स्थापना।
सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टरों की उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में उड़ान पर अस्थायी रोक।
सुप्रीम कोर्ट में तिमाही अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करना।
याचिका में यह भी कहा गया कि भारत को अपने विमानन संचालन को अंतरराष्ट्रीय मानकों (ICAO) के अनुरूप बनाना चाहिए।
हादसों की पृष्ठभूमि
याचिका में बताया गया कि इस वर्ष कई दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें सबसे गंभीर घटना 15 जून 2025 को घटी, जब केदारनाथ से लौट रहे तीर्थयात्रियों का हेलीकॉप्टर खराब मौसम में गौरीकुंड के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक दो वर्षीय बच्चा भी शामिल था। यह दुर्घटना अप्रैल 30 से शुरू हुई यात्रा का पाँचवाँ हेलीकॉप्टर हादसा था।
संवैधानिक और कानूनी आधार
याचिका में तर्क दिया गया कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार सुरक्षित वातावरण के अधिकार को भी समाहित करता है। इस प्रकार राज्य और DGCA का दायित्व है कि वे खतरनाक संचालन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएँ।
याचिकाकर्ता ने संवैधानिक नैतिकता (constitutional morality) का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा तंत्र की अनुपस्थिति संवैधानिक उद्देश्यों का उल्लंघन है।
इसके अतिरिक्त, याचिका में अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे ICAO Annex 19, ICAO Circular 301 और ICAO Doc 9859 का उल्लेख किया गया है, जिनमें सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली और भू-विशेष परिचालन आवश्यकताओं का पालन अनिवार्य है।
हेलिपैड और ऑपरेटरों पर सवाल
याचिका में कहा गया कि केदारनाथ का हेलिपैड भारत का सबसे व्यस्त मौसमी हेलिपैड है, लेकिन वहाँ क्रैश फायर रेस्क्यू जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।
कई ऑपरेटर कंपनियों पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी और प्रक्रियागत चूक के आरोप लगाए गए हैं, जिससे हजारों तीर्थयात्रियों, स्थानीय निवासियों और पायलटों की जान खतरे में पड़ी है।
शुभम अवस्थी का हस्तक्षेप
अधिवक्ता शुभम अवस्थी लंबे समय से राष्ट्रीय और जनहित के मुद्दे सुप्रीम कोर्ट में उठाते रहे हैं। उनकी याचिकाएँ हमेशा जवाबदेही और प्रणालीगत सुधार पर केंद्रित रही हैं। इस बार भी उनका तर्क है कि चारधाम यात्रा मार्ग पर लगातार होने वाले हादसे नियामक ढिलाई को दर्शाते हैं और अब तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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