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सरकार ने बल्क स्कॉच पर 75% आयात शुल्क का आश्वासन दिया।
यह निर्णय भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत लिया गया।
80% आयातित स्कॉच व्हिस्की पर विवाद समाप्त होगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रिटेन के साथ हुए नए व्यापार समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की के आयात शुल्क पर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने शराब कंपनियों को भरोसा दिलाया है कि बड़े कंटेनरों में आने वाली स्कॉच पर भी 75 प्रतिशत का घटा हुआ आयात शुल्क ही लागू रहेगा।
सोमवार को उद्योग के बड़े अधिकारियों के साथ हुई एक बंद कमरे की बैठक में वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत इस व्यापार समझौते का पूरी ईमानदारी से पालन करेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने आश्वासन दिया कि इस मामले को जल्द हल किया जा रहा है ताकि ड्यूटी में मिलने वाली छूट पर कोई असर न पड़े।
बता दें कि भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते (CETA) के तहत स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले 150% आयात शुल्क को घटाकर 75% कर दिया गया था। लेकिन टैक्स अधिकारियों का कहना था कि यह छूट सिर्फ बोतलों में आने वाली व्हिस्की पर है, बल्क में आने वाली स्कॉच पर नहीं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह मुद्दा बहुत अहम है क्योंकि भारत आने वाली कुल स्कॉच व्हिस्की का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बल्क में आता है। भारतीय कंपनियां इस स्कॉच को अपने स्थानीय स्पिरिट्स और अन्य चीजों के साथ मिलाकर भारतीय ब्रांड वाली व्हिस्की (IMFL) तैयार करती हैं।
गौरतलब है कि विवाद बढ़ने के बाद हाल ही में टैक्स अधिकारियों ने कुछ शराब कंपनियों के दफ्तरों पर छापेमारी भी की थी। इस मामले पर ब्रिटेन और स्कॉटलैंड की सरकारों ने भी चिंता जताई थी। भारत सरकार के इस नए आश्वासन से दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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