भारत में इजरायली दूतावास में मिशन के उप प्रमुख फारेस साएब ने कहा है कि उनका देश सभी बंधकों की वापसी तक गाजा शांति समझौते का पालन करना जारी रखेगा. साएब ने सोमवार (27 जनवरी, 2025) को यहां एक कार्यक्रम के दौरान पीटीआई-भाषा से कहा, ‘हम हस्ताक्षरित समझौते का तब तक पालन करेंगे जब तक कि हमारे सभी बंधक वापस नहीं आ जाते. जीवित बंधक अपने परिवारों के साथ अपना जीवन बिता सकेंगे जबकि मृतकों का उनके परिजन उचित तरीके से अंतिम संस्कार कर सकेंगे.’
इजरायली राजनयिक ने वार्ता के पहले चरण के सुचारू समापन की उम्मीद जतायी. उन्होंने कहा, ‘पहले चरण के बाद, हमास ने अंतिम महिला नागरिक बंधक को रिहा न करके समझौते को तोड़ने की कोशिश की. हमने इसे उल्लंघन के रूप में देखा, लेकिन पूरे समझौते को नहीं तोड़ने का फैसला किया क्योंकि हम अपने बंधकों को वापस चाहते हैं. हमने दूसरे चरण के साथ आगे बढ़ते हुए गाजावासियों की उत्तर की ओर आवाजाही को रोक दिया जब तक कि हमास समझौते का पालन नहीं करता.’
इजरायली राजनयिक ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में दो महिला बंधकों, एक नागरिक और एक सैनिक के साथ-साथ पांच पुरुष नागरिकों की रिहाई हो जाएगी.’ सोमवार को सुबह कतर ने कहा कि हमास शुक्रवार से पहले नागरिक बंधक अर्बेल येहुद को दो अन्य लोगों के साथ रिहा कर देगा. जवाब में, इजरायली अधिकारियों ने सोमवार से फलस्तीनियों को उत्तरी गाजा में लौटने की अनुमति देने पर सहमति जतायी.
माना जाता है कि करीब 90 बंधक अभी भी हमास की कैद में हैं. होलोकॉस्ट स्मरण दिवस से संबंधित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पश्चिम एशिया में हुई प्रगति पर प्रसन्नता जतायी. उन्होंने कहा, ‘मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि संघर्ष का समाधान करने के लिए प्रगति हो रही है. बंधकों की रिहायी और शांति वार्ता से उम्मीद है कि इस संघर्ष के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा.’
उन्होंने कहा, ‘जब आतंकवादी कृत्य होते हैं तो हम मूकदर्शक नहीं रह सकते. चुप्पी और निष्क्रियता ने ऐतिहासिक रूप से नफरत और हिंसा को पनपने दिया है.’ केंद्रीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत नस्ली और धार्मिक असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं को चिंता के साथ देखता है.
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