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हरियाणा सरकार ने रेवाड़ी जिले के गुड़ियानी गांव में स्थित बाबू बालमुकुंद गुप्त की पैतृक हवेली को 'संरक्षित विरासत' घोषित किया है। बाबू बालमुकुंद गुप्त …और पढ़ें
हरियाणा सरकार ने रेवाड़ी जिले के गुड़ियानी गांव में स्थित बाबू बालमुकुंद गुप्त की पैतृक हवेली को ‘संरक्षित विरासत’ घोषित किया (फोटो: जागरण)
जागरण संवाददाता, झज्जर। अपनी कलम को झज्जर से चलाना सीखकर देशभर में ख्याति प्राप्त लेखक, पत्रकार और शब्दों की टकसाल कहलाने वाले बाबू बाल मुकुंद गुप्त की हवेली को अब संरक्षित विरासत घोषित किया गया है।
सरकार के विरासत एवं पर्यटन विभाग ने रेवाड़ी जिले के गांव गुड़ियानी स्थित बाबू बालमुकुंद गुप्त की पैतृक हवेली को संरक्षित विरासत के रूप में अधिसूचित किया है, जिसके लिए बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद्, रेवाड़ी ने हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आभार जताया है।
उक्त जानकारी देते हुए परिषद् के महासचिव डॉ प्रवीण खुराना ने बताया कि सन् 1865 में गुड़ियानी में जन्मे गुप्त जी हिंदी पत्रकारिता के मसीहा तथा हिन्दी गद्य के जनक के रूप में लब्धप्रतिष्ठ हैं, इसलिए उनकी हवेली साहित्यिक तीर्थ से कम नहीं है।
झज्जर में उनके नाम जिला पुस्तकालय सरकार की ओर से संचालित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा अब इसे संरक्षित विरासत घोषित किए जाने के बाद परिषद् की चिरलंबित मांगें जैसे इस हवेली को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने, इसमें गुप्त जी का संग्रहालय, वाचनानालय ,पुस्तकालय खोले जाने तथा हवेली को राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
परिषद् के संरक्षक अधिवक्ता नरेश चौहान ‘राष्ट्रपूत’ तथा अध्यक्ष ऋषि सिंहल ने बताया कि परिषद् पिछले तीन दशकों से इस हवेली की संरक्षण के लिए प्रयासरत है। गुप्त जी के प्रपौत्र विमल गुप्त ने मुख्यमंत्री घोषणा अनुसार यहां ई-लाइब्रेरी बनाने के उद्देश्य से इसकी रजिस्ट्री सरकार के नाम भी करवा दी थी।
अब इसे संरक्षित विरासत घोषित करके प्रदेश सरकार ने गुप्त जी, साहित्य ,पत्रकारिता तथा उनकी जन्मस्थली को सच्चा सम्मान दिया है, जिसके लिए परिषद् मुख्यमंत्री से मिलकर क्षेत्र के सभी कलमकारों की ओर से उनका आभार ज्ञापित करेगी।
प्रदेश सरकार द्वारा जारी गई की गई इस अधिसूचना से क्षेत्र के साहित्यकारों तथा साहित्य प्रेमियों में खुशी की लहर व्याप्त है। परिषद् के संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ चंद्र त्रिखा चंडीगढ़,बिमल गुप्त कोलकाता,उपाध्यक्ष साहित्यकार रोहित यादव मंडी अटेली, कृष्ण भगवान गोयल, महासचिव सत्यवीर नाहड़िया, कोषाध्यक्ष आचार्य रामतीर्थ, सचिव ईश्वर सिंह, गुड़ियानी के सरपंच नरेंद्र सिंह सहित क्षेत्र के साहित्यकारों ने अकादमी अध्यक्ष से मुख्यमंत्री श्री सैनी का आभार जताया है।