₹1 करोड़ का घर ₹1.8 करोड़ में बिका फिर भी जेब खाली, रियल एस्टेट का वो गणित' जो आपको नहीं पता – AajTak

किसी प्रॉपर्टी की कीमत दोगुनी होना अक्सर निवेश की एक परफेक्ट कहानी जैसा लगता है. मान लीजिए, आपने ₹1 करोड़ में एक घर खरीदा और कुछ सालों बाद उसे ₹1.8 करोड़ में बेच दिया. आंकड़ों को देखकर पहली नजर में यही लगता है कि सीधे-सीधे ₹80 लाख का मुनाफा हुआ है, लेकिन सीए (CA) नितिन कौशिक के मुताबिक, यह गणित उतना सीधा नहीं है जितना दिखाई देता है.
नितिन का मानना है कि कई लोग उन छिपे हुए खर्चों, टैक्स और लागतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बैंक अकाउंट में पैसा आने से पहले ही रियल एस्टेट के रिटर्न को चुपके से कम कर देते हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस बारे में बताते हुए सीए नितिन कौशिक ने प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने के इस पॉपुलर विश्वास को एक “मैथ इल्यूजन” करार दिया. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर ₹1 करोड़ में खरीदे गए अपार्टमेंट को ₹1.8 करोड़ में बेचने का जश्न तो मनाते हैं, लेकिन उन खर्चों पर ध्यान नहीं देते जो वास्तविक मुनाफे को घटा देते हैं.
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That ₹1 crore apartment that supposedly sold for ₹1.8 crore is the biggest math ILLUSION on your timeline.

Everyone cheers for the ₹80 lakh profit, but nobody talks about what quietly disappears stamp duty paid at purchase, brokerage of 1 to 2%, and LTCG tax at 12.5%…
इन खर्चों को किया जाता है नजरअंदाज
नितिन कौशिक के अनुसार, रियल एस्टेट से होने वाले मुनाफे का हिसाब लगाते समय कई तरह की लागतों को छोड़ दिया जाता है. इनमें शामिल हैं
स्टैम्प ड्यूटी: प्रॉपर्टी खरीदते समय दिया जाने वाला सरकारी शुल्क. 
ब्रोकरेज चार्ज: जो आमतौर पर कुल कीमत का 1% से 2% तक होता है
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG): प्रॉपर्टी बेचने पर लगने वाला टैक्स
कौशिक ने इस बात पर जोर दिया कि अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर ये खर्चे उस रकम को काफी कम कर देते हैं, जो आखिरकार एक निवेशक के हाथ में आती है, उन्होंने समझाया कि टैक्स और अन्य खर्चे मिलकर उस ₹80 लाख के दिखने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा खा जाते हैं, अंतिम मुनाफा इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी कितने समय तक पास में रखी गई, उसकी लोकेशन क्या है और उस पर कितने खर्चे आए.
कौशिक ने एक और बड़े फैक्टर की ओर इशारा किया जिसे अक्सर प्रॉपर्टी मालिक भूल जाते हैं, और वह है होम लोन का ब्याज. वर्तमान में होम लोन की ब्याज दरें लगभग 8.5% से 9.25% के बीच हैं. ऐसे में कर्ज की कुल लागत को जोड़ने के बाद वास्तविक रिटर्न की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है.
उनके मुताबिक, अगर सभी खर्चों का ईमानदारी से हिसाब लगाया जाए, तो किसी अपार्टमेंट से मिलने वाला रिटर्न कभी-कभी बैंक की एक साधारण फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बराबर ही रह जाता है, और कुछ मामलों में तो यह उससे भी कम हो सकता है.
सीए कौशिक ने आगे समझाया कि भले ही भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हों, लेकिन किसी भी बिल्डिंग का फिजिकल स्ट्रक्चर हमेशा एक जैसा नहीं रहता. समय के साथ बिल्डिंग पुरानी होती जाती है और उसका रेगुलर मेंटेनेंस चार्ज एक ऐसा लगातार होने वाला खर्च बन जाता है, जो लॉन्ग-टर्म रिटर्न को सीधे प्रभावित करता है.
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