By Rishabh Kumar | Updated: July 21, 2026 10:57 PM IST
भारत के मौसमी क्लाउड मैप में इन दिनों ज्यादातर हिस्सा सफेद नजर आ रहा है. इसका मतलब है कि देश के कई हिस्सों में घने और ऊंचे बादल बने हुए हैं. ISRO के INSAT-3DR सैटेलाइट और IMD की तस्वीरों में सफेद या चमकीले हिस्से आमतौर पर मोटे बादलों को दिखाते हैं. ऐसे बादल सूर्य की रोशनी को ज्यादा रोकते हैं. जुलाई के बीच में अचानक बढ़ा यह क्लाउड कवर मॉनसून के फिर से एक्टिव होने का संकेत माना जा रहा है.
जून के दौरान देश के कई हिस्सों में मॉनसून कमजोर रहा था. कई राज्यों में बादल कम बने और बारिश भी उम्मीद से कम हुई. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी और कुछ इलाकों में पानी की कमी का डर पैदा होने लगा था. लेकिन जुलाई के मध्य तक मौसम की तस्वीर काफी बदल गई. मॉनसून ट्रफ के मजबूत होने और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी आने के कारण बादल तेजी से बढ़े. इसी वजह से क्लाउड मैप पर पूरा भारत सफेद दिखाई दे रहा है.
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में मॉनसून काफी एक्टिव रह सकता है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मेघालय जैसे राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. कई जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है. इसके अलावा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है. लोगों को मौसम विभाग के स्थानीय अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 24 जुलाई तक कई जगह बारिश हो सकती है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 26 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में भी 23 जुलाई तक अच्छी बारिश हो सकती है. पूर्वी राजस्थान में 23 से 26 जुलाई के बीच बारिश बढ़ने का अनुमान है. मध्य भारत में छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी 26 जुलाई तक बारिश हो सकती है. पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत में भी कई जगह भारी बारिश की संभावना है.
मॉनसून के दोबारा मजबूत होने के पीछे कई मौसम संबंधी कारण बताए जा रहे हैं. जून में ऊपरी हवा की स्थिति में बदलाव के कारण मॉनसून का सर्कुलेशन कमजोर हुआ था. अब मॉनसून ट्रफ उत्तर भारत के आसपास मजबूत हुई है. इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी का प्रवाह भी बढ़ गया है. दोनों तरफ से आ रही नमी के कारण बादल बनने की प्रक्रिया तेज हुई है. यही वजह है कि सैटेलाइट तस्वीरों में बड़े हिस्से पर घने बादल दिखाई दे रहे हैं.
मॉनसून का यह एक्टिव फेज किसानों के लिए राहत लेकर आया है. अच्छी बारिश से खेतों में पानी पहुंचेगा, जलाशयों का स्तर बढ़ सकता है और फसलों को फायदा मिलेगा. हालांकि बहुत ज्यादा बारिश अपने साथ कई परेशानियां भी ला सकती है. पहाड़ी राज्यों में लैंडस्लाइड, नदियों में बाढ़ और शहरों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए भारी बारिश वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों के लिए बारिश को लेकर अलर्ट जारी किए हैं.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड मैप पर बड़े हिस्से में सफेदी मॉनसून के मजबूत होने का संकेत हो सकती है. जब घने और ऊंचे बादलों की संख्या बढ़ती है, तो यह ज्यादा नमी और बारिश की एक्टिविटी को दिखाता है. आने वाले दिनों में उत्तर और पूर्वी भारत में मॉनसून की ताकत बनी रहने की उम्मीद है. हालांकि पूरे देश में बारिश एक जैसी नहीं होगी. दक्षिण और कुछ पश्चिमी हिस्सों में बारिश कम रह सकती है. इसलिए यह फेज मजबूत जरूर है, लेकिन बारिश का बंटवारा अभी भी अलग-अलग इलाकों में अलग रहेगा.
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