20 जून के बाद वाराणसी में एक और मस्जिद पर चलेगा बुलडोजर, डेडलाइन बनी सस्पेंस – AajTak

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वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी मॉडल टर्मिनल परियोजना के बीच गंज शहीदा मस्जिद को लेकर नया विवाद सामने आ गया है. उत्तर रेलवे की तरफ से मस्जिद के बाहर एक नोटिस चस्पा किया गया है, जिसमें 20 जून 2026 तक रेलवे की जमीन से मस्जिद को हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है. नोटिस लगने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और मस्जिद से जुड़े लोगों ने रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. रेलवे की तरफ से जारी नोटिस में कहा गया है कि काशी रेलवे स्टेशन के प्रथम प्रवेश द्वार की ओर, सर्कुलेटिंग एरिया के पास रेलवे भूमि पर अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है. नोटिस में दावा किया गया है कि यह निर्माण स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों में बाधा बन रहा है.
रेलवे प्रशासन ने अपने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि मूलवाद संख्या 1174/1991, अंजुमन इंतजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, सिविल जज जूनियर डिवीजन शहर वाराणसी की अदालत में विचाराधीन था. रेलवे के अनुसार यह मामला 28 अगस्त 2024 को अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था. इसके आधार पर रेलवे प्रशासन ने रेलवे भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण को हटाने का निर्णय लिया है.
नोटिस में संबंधित पक्षों से कहा गया है कि वे 20 जून 2026 तक स्वयं निर्माण हटा लें. अन्यथा रेलवे प्रशासन उक्त तिथि के बाद किसी भी दिन मस्जिद को हटाने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है. दूसरी ओर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने भी रेलवे के नोटिस के बगल में अपना जवाब चस्पा किया है. कमेटी ने रेलवे के नोटिस को भ्रामक बताते हुए कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
नोटिस में रेलवे जमीन पर अवैध निर्माण का दावा
कमेटी का कहना है कि रेलवे द्वारा लगाए गए नोटिस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही उसमें जारी करने की तारीख दर्ज है.  इसलिए इसकी वैधता पर सवाल खड़े होते हैं. कमेटी ने यह भी कहा कि जिस मुकदमे के खारिज होने का उल्लेख नोटिस में किया गया है, वह मस्जिद से संबंधित नहीं था. उनके अनुसार वह मुकदमा मस्जिद के बाहर पूर्व दिशा की जमीन से जुड़ा था और मस्जिद का उससे कोई संबंध नहीं था. इसलिए नोटिस में दी गई जानकारी भ्रामक है.
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी का यह भी दावा है कि इसी मुकदमे में रेलवे प्रशासन ने अपने शपथ पत्र में मस्जिद के अस्तित्व और मुसलमानों की मिल्कियत को स्वीकार किया था. कमेटी ने मस्जिद के इतिहास का हवाला देते हुए कहा है कि यह मस्जिद सन 1034 में बनी थी. उनका दावा है कि 1883-84 के बंदोबस्त नक्शे में भी इसका उल्लेख मौजूद है और इससे पहले के नक्शों में भी मस्जिद दर्ज है. कमेटी का कहना है कि राजघाट क्षेत्र में रेलवे वर्ष 1887 में आई थी. ऐसे में मस्जिद रेलवे से पहले की है.
मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि रेलवे प्रशासन द्वारा इसे अवैध बताना गलत है. उनका कहना है कि लगभग 15 परिवार मस्जिद परिसर में रहते हैं और यह स्थान लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. उन्होंने रेलवे की कार्रवाई को अनुचित और भ्रामक बताया है. कमेटी ने साफ कहा है कि यदि मस्जिद को हटाने की कोशिश की जाती है तो वह हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेगी. उनके अनुसार इस संबंध में कानूनी प्रक्रिया पहले से जारी है और रेलवे का नोटिस कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कदम हो सकता है.
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब काशी रेलवे स्टेशन को एक भव्य मल्टी मॉडल इंटर मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है. लगभग 336 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों को ट्रेन, बस और जल परिवहन की सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है.
मस्जिद 1034 की बनी होने का दावा

परियोजना के तहत रेलवे स्टेशन, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और जल परिवहन सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा. स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा. यहां अंडरग्राउंड प्लेटफॉर्म, आधुनिक टिकट काउंटर, फूड प्लाजा और रिटायरिंग रूम जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं. साथ ही नमो घाट और अन्य घाटों तक जल परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल गंज शहीदा मस्जिद को लेकर रेलवे और मस्जिद प्रबंधन के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है. अब सभी की नजर 20 जून की समय सीमा और उसके बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है.
 
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