सिरसा के जीवन दास तनेजा ने 30 वर्षों तक सरकारी स्कूलों में अवैतनिक सेवा प्रदान कर समाज में एक मिसाल कायम की है। उनके इस अद्वितीय कार्य को जेम्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
जीवन दास तनेजा का सपना बच्चों को शिक्षित करना था, जिसे वे अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी जारी रखे हुए हैं। उन्हें यह प्रेरणा अपनी दादी और माता-पिता के संस्कारों से मिली, जिन्होंने सिखाया कि धन से अधिक महत्वपूर्ण जीवन है और जरूरतमंदों की मदद करना कर्तव्य है।
साक्षरता मिशन से शुरू हुआ सफर
इस सीख को आत्मसात कर उन्होंने शिक्षा का अलख जगाने का बीड़ा उठाया। शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन परिवार और मित्रों के सहयोग से उन्होंने इसे जारी रखा। 1986 में नेशनल कॉलेज सिरसा से स्नातक करने के बाद, उन्होंने साक्षरता मिशन में सक्रिय सहभागिता की।
1996 से सरकारी स्कूलों में दी सेवाएं
वर्ष 1996 से जीवन दास तनेजा ने विभिन्न सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दीं और हजारों बच्चों के जीवन को रोशन किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई उनकी अनुपस्थिति में प्रभावित न हो। वे अपने निजी कार्य भी छुट्टी के दिनों में निपटाते थे ताकि शिक्षण कार्य बाधित न हो।
31 मार्च 2026 तक जारी रहेगा सेवा कार्य
30 वर्षों की अवैतनिक सेवा के बाद, जीवन दास तनेजा 20 मार्च 2026 को 62 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे। हालांकि, उनका सेवा कार्य 31 मार्च 2026 तक जारी रहेगा।
रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज, क्षेत्र में सम्मान
इन वर्षों में उन्हें कई बुद्धिजीवी और शिक्षाविदों से प्रोत्साहन मिला। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और जेम्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने से उनका मनोबल और बढ़ा। आज पूरे क्षेत्र में उन्हें सम्मान मिल रहा है और उनके प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
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