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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए शेयर बाजार में कथित ‘Pump and Dump’ फ्रॉड की जांच के सिलसिले में 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की है. इस मामले में दो लिस्टेड कंपनियों आर.एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड और आर एंड बी डेनिम्स लिमिटेड के शेयरों में कथित हेरफेर की जांच की जा रही है.
ED की मुंबई जोनल ऑफिस-I की टीम ने 16 अक्टूबर 2026 को मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में यह कार्रवाई की. छापेमारी PMLA, 2002 के तहत की गई. जांच में कंपनियों के कार्यालयों, प्रमोटरों के आवास और शेयरों के आवंटन से जुड़े लोगों के ठिकानों की तलाशी ली गई.
ED की जांच के मुताबिक, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए थे. जांच एजेंसी को शक है कि इन आवंटनों के लिए भुगतान की गई रकम का बड़ा हिस्सा आपस में जुड़े कुछ लोगों, कंपनियों और कर्जदाताओं के एक सीमित समूह से आया था.
इसके बाद अगले कुछ महीनों में इन कंपनियों के शेयरों की कीमत धीरे-धीरे बढ़ाई गई, जबकि शेयरों का बड़ा हिस्सा उन्हीं लोगों के पास बना रहा. ED इस पूरी प्रक्रिया को शेयरों की कीमत बढ़ाने और उससे फायदा उठाने की कथित योजना के तौर पर देख रही है.
जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों से फरवरी 2026 के बीच व्हाट्सएप पर ‘मल्टीबैगर स्टॉक्स’ जैसे नामों से कई ग्रुप सक्रिय थे. इन ग्रुपों में रिटेल निवेशकों को रोजाना दोनों कंपनियों के शेयर खरीदने के टिप्स भेजे जाते थे. ED के मुताबिक, इन ग्रुपों को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर हासिल किए गए SIM कार्ड का इस्तेमाल किया गया, जबकि इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था.
शेयर खरीदने के इन संदेशों के बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में खरीदारी करने वाले निवेशकों की संख्या कई गुना बढ़ गई. इससे शेयरों की कीमतों में और तेजी आने की बात जांच में सामने आई है.
ED की जांच के अनुसार, आर एम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स लिमिटेड के शेयरों को व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए प्रचारित किया गया, ताकि निवेशकों के बीच उन्हें खरीदने की दिलचस्पी बढ़े. इस प्रचार अभियान के दौरान शेयर की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई.
जांच एजेंसी का आरोप है कि कम कीमत पर अधिमानी आवंटन के जरिए शेयर और वारंट हासिल करने वाले लोगों ने बढ़ी हुई खरीदारी का फायदा उठाया. उन्होंने अपने पास मौजूद शेयरों का एक हिस्सा बड़ी संख्या में निवेशकों को बेच दिया. शेयरों की कीमत बढ़ने के बाद की गई इस बिक्री से जुड़े लेनदेन और निवेशकों को हुए नुकसान की जांच की जा रही है. शेयर बाजार में इस तरह पहले कीमत बढ़ाने और फिर शेयर बेचकर निकलने की रणनीति को ‘Pump and Dump’ कहा जाता है.
छापेमारी के दौरान ED ने कथित योजना से लाभ पाने वाले कुछ ऐसे समूहों की पहचान की, जिनमें परिवार से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित पक्षों के नाम शामिल हैं. इनमें Affluence Gems और उससे जुड़े लोग, Kawa HUF और उससे जुड़े लोग, तथा Komalay Consultancy और उससे जुड़े लोग शामिल हैं. जांच में एजेंसी को पता चला कि इन लाभार्थियों ने Preferential Warrants के जरिए संबंधित कंपनियों के शेयर कम कीमत पर हासिल किए थे.
इसके बाद WhatsApp, Twitter (X), SMS और दूसरे माध्यमों के जरिए शेयरों को लेकर प्रचार अभियान चलाए जाने की बात सामने आई. ED इन समूहों के बीच संबंधों, शेयर आवंटन, पैसे के लेनदेन और कीमतों में हुई बढ़ोतरी की कड़ियों की जांच कर रही है.
ED ने इस कार्रवाई के दौरान संबंधित व्यक्तियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य के ट्रेडिंग अकाउंट फ्रीज किए हैं. तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयरों की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त किए गए.
इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए एजेंसी कथित शेयर हेरफेर में शामिल लोगों, कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
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