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नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही का आंकड़ा 600 के पार पहुंच गया है. अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं. इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. राहत की बात है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं. पहाड़ी इलाकों में राहत-बचाव का काम अभी जारी है. इसी बीच भोटेकोशी नदी के पास फिर पानी बढ़ने लगा है, जिससे एक और बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. हालांकि, शनिवार सुबह 6:30 बजे तक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में पानी का बहाव सामान्य बताया गया है.
इस तबाही की शुरुआत पहाड़ों के ऊंचाई वाले इलाके से हुई. शुरुआती जांच के मुताबिक, एक ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का भारी हिस्सा नीचे आ गिरा. यह मलबा लेंडे नदी में गिरा, जिससे पानी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया. इसके बाद जब यह कुदरती रुकावट टूटी, तो पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया. इसकी चपेट में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाके आ गए, जिससे कई बस्तियां, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह हो गईं
बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना है. पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें और पुल बह जाने से बचाव दलों को मौके तक पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है. नेपाल रेड क्रॉस के मुताबिक, इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. बाढ़ का असर जलविद्युत परियोजनाओं पर भी पड़ा है. 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता बताए गए, जिनमें से 254 लोगों को बचा लिया गया. कई अन्य सुरंगों में फंसे होने की आशंका है. अकेले अपर त्रिशूली-1 परियोजना से 576 कर्मचारियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
नदी के रास्ते में बनी झील ने बढ़ाई चिंता
पहली बाढ़ की तबाही के बाद अब नई चिंता नदी के ऊपरी हिस्से में बनी अस्थायी झील को लेकर है. नदी का रास्ता मलबे से रुकने के कारण यहां पानी जमा हो रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से भी इसकी लगातार निगरानी की जा रही है. चीनी अधिकारियों के मुताबिक, इस झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और आने का अनुमान है. अगर पानी का दबाव बढ़ा और झील की कुदरती रुकावट टूटी, तो नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ आ सकती है.
ताजा स्थिति क्या है?
ताजा जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह 6:30 बजे तक रसुवा की भोटेकोशी और नुवाकोट से होकर बहने वाली त्रिशूली नदी में पानी का बहाव सामान्य है. बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने बताया कि दोनों नदियों के जलस्तर में फिलहाल कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है. बाढ़ पूर्वानुमान शाखा के जल वैज्ञानिक प्रभाकर यादव के मुताबिक, पानी तेजी से बढ़ता हुआ नहीं दिखा है. वहीं तिब्बत में उस जगह की मौजूदा स्थिति को लेकर अभी कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मिली है, जहां से पिछली बाढ़ का संकट शुरू हुआ था.
फिर भी खतरा क्यों बना हुआ है?
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, नदी के रास्ते में बनी अस्थायी झील की वजह से खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यानी इस समय नदियों का पानी सामान्य जरूर है, लेकिन ऊपर जमा पानी और मलबे की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी है. इसी वजह से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों, मुसाफिरों और बचाव दलों को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है.
इस कुदरती आफत की मार सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीमा पार चीन के तिब्बत इलाके में भी भारी तबाही हुई है. यहां ग्यिरोंग काउंटी में आई बाढ़ में 5 लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 558 लोग लापता हैं. इनमें 260 विदेशी नागरिक बताए गए हैं. तेज पानी ने गांवों, बिजलीघरों, सड़कों, पुलों और संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. इसका असर काठमांडू-ल्हासा के बीच आने-जाने वाले रास्ते पर भी पड़ा है.
320 भारतीयों से संपर्क नहीं
संकट के बीच भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से भी अहम जानकारी सामने आई है. ताजा अपडेट के मुताबिक, 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है. इनमें करीब 100 लोग त्रिशूली जलविद्युत परियोजना में फंसे हुए हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं. वहीं सीमा के पास फंसे 96 भारतीय नेपाल पहुंच चुके हैं. भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री की दो खेप भी भेजी हैं.
सैलाब में 36 से ज्यादा पुल बह जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है. इससे जरूरतमंद लोगों तक राशन, दवाएं और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. रास्तों को जल्द जोड़ने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है. राहत-बचाव अभियान में सेना के 2,391 जवानों समेत कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हैं. टीमें लगातार मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रही हैं. इसी बीच भोटेकोसी नदी के ऊपरी हिस्से में बनी झील पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसके टूटने से एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.
फिलहाल नदी का बहाव सामान्य है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. सबसे ज्यादा नजर उस अस्थायी झील पर है, जिसके टूटने पर नीचे के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है.
इस भयावह हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं. लापता लोगों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद है. राहत-बचाव में जुटी सभी टीमों की सुरक्षा के लिए भी प्रार्थना है.
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