Azamgarh School Controversy: आजमगढ़ के रानी की सराय में मौजूद एक प्राइवेट स्कूल में उर्दू में मजहबी तालीम का वीडियो वायरल होने पर हिंदूवादी संगठनों ने हंगामा खड़ा कर दिया. आरोपों के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए है. स्कूल प्रबंधन ने सफाई दी है, जबकि संविधान निजी संस्थानों को तालीम देने की इजाजत देता है इसके बावजूदा हिंदूवादी संगठनों का विवाद सवालों के घेरे में है.
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Azamgarh News: उत्तर प्रदेश में हिंदूवादी संगठन आए दिन मुसलमानों के मजहबी जगह, स्कूल, मदरसे, खान-पान, त्योहार और उनके इबादत करने के तरीकों को लेकर विवाद खड़ा करते रहे हैं. वहीं, अब आजमगढ़ के एक प्राइवेट स्कूल में उर्दू में मजहबी तालीम देने को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने हंगामा खड़ा कर दिया. मुस्लिम बच्चों के पढ़ाने की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. जिसे दक्षिणपंथी संगठन धार्मिक कट्टरता और गैर-कानूनी बता रहे हैं.
यह पूरा मामला आजमगढ़ जिले के रानी की सराय क्षेत्र में स्थित आजमगढ़ पब्लिक स्कूल का है. इस स्कूल में मुस्लिम बच्चों को मजहबी तालीम दी जा रही थी और उनसे सवाल पूछे जा रहे थे. इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने वावेला खड़ा कर दिया. हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि इसके जरिये कट्टरता फैलाई जा रही है और धर्मांतरण कराया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इस स्कूल की स्थापना समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली ने की है.
हिंदूवादी संगठनों के दबाव में प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
हैरानी तो तब हुई जब हिंदूवादी संगठनों के दबाव के बाद जिला प्रशासन के जरिये तीन टीमों का गठन कर गोपनीय जांच किए जाने की बात सामने आई है. लोगों ने हिंदूवादी संगठनों के हंगामा करने और जिला प्रशासन के जांच के आदेश पर हैरानी जताई. उनका कहना है कि मिशनरी स्कूल में जीजस की जानकारी सभी बच्चों को देते हैं, तो क्या इसे भी इसाई बनाना नहीं कहेंगे, या फिर सरस्वती शिशु मंदिर में संस्कृत पढ़ाते हैं और इसमें मजहब से जुड़ी बाते बताते हैं, तो क्या इसे भी हिन्दू बनाना नहीं कहेंगे.
समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली के जरिये स्थापित यह स्कूल आजमगढ़-बनारस मार्ग पर जिले के रानी की सराय क्षेत्र में मौजूद है. आज़मगढ़ पब्लिक स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं. यह कथित विवादित वीडियो 23 दिसंबर की बताई जा रही है. इस वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ बच्चे स्कूल ड्रेस में खड़े दिखाई दे रहे, जबकि कैमरे के पीछे मौजूद टीचर बच्चों से मजहबी सवाल पूछ रही हैं. इसका बच्चे खुशी से जवाब दे रहे हैं.
प्रिंसिपल रूपल पंड्या ने दी सफाई
हिंदूवादी संगठनों के हंगामे के बाद आजमगढ़ पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रूपल पंड्या ने बताया कि वायरल वीडियो के संबंध में संबंधित टीचर से जवाब मांगा गया है. टीचर का जवाब मिलते ही जरुरी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा है कि वायरल वीडियो उनके स्कूल का है या नहीं यह टीचर का जवाब आने के बाद ही पता चल सकेगा. वायरल वीडियो कब का है इसके संबंध में भी संबंधित का जवाब आने के बाद बताया जा सकता है.
विश्व हिंदू महासंघ नाम की संस्था के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह साधु ने इस्लाम और मुसलमानों को लेकर विवादित बयान दिया. अरुण कुमार सिंह साधु ने दावा किया कि आजमगढ़ पब्लिक स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है ना कि कोई मदरसा है. पब्लिक स्कूल में दीनी तालीम देना बेहद निंदनीय है, क्योंकि इस स्कूल में सभी मजहब के बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में सिर्फ इस्लाम की तालीम देना आपत्तिजनक है.
अरुण कुमार सिंह साधु ने कहा की वह अपने लेटर पैड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर स्कूल की मान्यता खत्म करने के साथ ही सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे. अरुण कुमार ने जिला प्रशासन से भी मांग की है कि वायरल वीडियो की जांच कर करके स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
कानून देता है मजहबी तालीम देने के इजाजत
वहीं, इस वायरल वीडियो को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने समाजवादी पार्टी के आजमगढ़ पब्लिक स्कूल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 28 शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा से जुड़े नियम तय करता है. जिन स्कूलों में स्टेट से फंड मिलता है, वहां पर मजहबी तालीम प्रतिबंधित है, जबकि प्राइवेट स्कूलों को छूट दी गई. इसी तरह आर्टिकल 30, देश के अल्पसंख्यक समुदायों (धार्मिक या भाषाई) को अपनी स्कूल और शिक्षण संस्तान स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है, जिसमें वे अपनी मजहबी और सांस्कृतिक शिक्षा दे सकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह स्कूल प्राइवेट है तो कानून के दायरे में रहकर तालीम दे रहा है, तो हिंदूवादी संगठन हंगामा क्यों कर रहे हैं और कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं.
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रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू…और पढ़ें
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