बंगाल का ये स्पेशल जोन और 4 जिले… कांग्रेस किस गेम की गोटियां सजा रही है? – aajtak.in

Feedback
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के बीच सिमटते मुकाबले को कांग्रेस त्रिकोणीय बनाना चाहती है. कांग्रेस ने बंगाल की सभी 294 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. इस बार पार्टी ने अपने बड़े चेहरों को चुनाव में उतारा है, जिनके दम पर राज्य के चुनावी सीन को बदलना चाहती है. 
कांग्रेस ने अपने करीब 30 दिग्गज नेताओं को बंगाल चुनाव में उतारा है ताकि पार्टी अपनी खोई हुई साख को बचाने, जमीनी संगठन को मजबूत रखने और ममता बनर्जी व बीजेपी के बीच चल रही सीधी लड़ाई में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की है. 
बंगाल में कांग्रेस की नजर मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर जिले की सीटों पर है. इन्हीं चार जिलों पर कांग्रेस का पूरा दांव लगा हुआ है. मौसम बेनजीर नूर, अधीर रंजन चौधरी, मोहित सेनगुप्ता जैसे नाम शामिल है.  ऐसे में कांग्रेस अपने दिग्गजों के सहारे बंगाल में खाता खोलने या फिर किंगमेकर बनने की जुगत में है?
बंगाल में कांग्रेस ने उतारे अपने दिग्गज
कांग्रेस ने अपने सबसे कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को उनके परंपरागत गढ़ बहरामपुर से टिकट दिया है, जो करीब 30 साल के बाद विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे हैं. अधीर ने1996 में नवग्राम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा व जीता था, उसके बाद से सांसद बनते रहे. अब पार्टी ने फिर से उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारा है. 
बंगाल में कांग्रेस का दूसरा प्रमुख नाम मौसम बेनजीर नूर का है, जिन्होंने हाल में तृणमूल से वापसी की है. मालदा क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मौसम नूर को मालतीपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया है . कांग्रेस भवानीपुर में प्रदीप प्रसाद को प्रत्याशी बनाया है, जहां पर तृणमूल से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व भाजपा से सुवेंदु अधिकारी प्रत्याशी हैं. 
नंदीग्राम सीट से शेख जरियातुल हुसैन को प्रत्याशी बनाया है. रायगंज से मोहित सेनगुप्ता, जलांगी से अब्दुल रेज्जाक मोल्ला, चकुलिया से अली इमरान रम्ज़ और बालीगंज सीट से रोहन मित्रा जैसे दिग्गज नेता को उतारा है. इस तरह से कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को बंगाल के रणभूमि में उतारकर चुनावी गेम को बदलने की रणनीति अपनाई है. 
बंगाल में कांग्रेस क्या खोल पाएगी खाता
पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कभी एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की जंग लड़ रही है. कांग्रेस के लिए बंगाल की राजनीतिक जमीन ‘बंजर’ हो चुकी है. 1977 में सत्ता गंवाने के बाद से शुरू हुआ कांग्रेस का ‘वनवास’ 2026 के चुनाव तक एक ऐसी त्रासदी बन चुका है, जहां पार्टी के पास न तो विधानसभा में कोई प्रतिनिधि है, न संगठन में पुरानी धार बची. 
कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ गठबंधन कर भी कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई है. 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी. कांग्रेस का वोट शेयर भी घटकर सिर्फ़ 3 फीसदी पर रह गया था. ऐसे में कांग्रेस ने 30 साल के बाद बंगाल में अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया. ऐसे में कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद सहित तमाम बड़े नेताओं को विधानसभा चुनाव में उतार दिया है. 
बंगाल में कांग्रेस क्या करिश्मा दिखाएगी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में इज्जत बचाने के लिए कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेताओं को भी मैदान में उतारा है. इस बार कांग्रेस खासतौर पर उत्तर बंगाल में मालदा और उत्तर दिनाजपुर और मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिलों से सीट जीतने की उम्मीद कर रही है. इन जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ता अन्य जिलों की तुलना में अभी भी काफी सक्रिय हैं.
कांग्रेस इन जिलों में भाजपा और तृणमूल को चुनौती देने की स्थिति में दिख रही है. मालदा जिले की मालतीपुर सीट से कांग्रेस ने पूर्व सांसद मौसम बेनजीर नूर को टिकट दिया है, जो गनी खान चौधरी परिवार से जुड़ी हैं. मालदा में कांग्रेस का परंपरागत आधार रहा है. यहां पर उनका मुकाबला टीएमसी के विधायक अब्दुर रहीम बक्सी से है.  बीजेपी ने आशीष दास और वाम मोर्चा ने मनिरूल हुसैन को मैदान में उतारा है.
चाकुलिया सीट से कांग्रेस ने पूर्व विधायक अली इमरान रमज उर्फ विक्टर को उम्मीदवार बनाया है.  टीएमसी ने मिन्हाजुल अरफिन, बीजेपी ने मनोज जैन और वामपंथी दल से अमजद अली मैदान में है. रायगंज से कांग्रेस ने पूर्व नगर पालिका चेयरमैन मोहित सेनगुप्ता किस्मत आजमा रहे हैं, जहां उनका मुकाबला टीएमसी के  पूर्व विधायक कृष्णा कल्याणी, भाजपा ने कौशिक चौधरी और वाममोर्चा ने जीवनंदा सिंबा से है. 
कांग्रेस 10 साल पुराने दुर्ग को दुरुस्त कर रही
कांग्रेस बंगाल में सिर्फ खाता ही नहीं खोलना चाहती है बल्कि किंगमेकर भी बनने की प्लानिंग कर रही है. बंगाल में इस बार जिस तरह से बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधा मुकाबला होता दिख रहा है. 2021 से अलग 2026 का चुनाव है. ऐसे में कांग्रेस को लग रहा है कि अगर पार्टी के खाते में 10 से 15 सीटें आ जाती हैं तो फिर सत्ता की चाबी उसके हाथ में होगी. इसीलिए कांग्रेस ने मुस्लिम बहुल सीटों पर खास फोकस किया. 
कांग्रेस मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर पर ध्यान केंद्रित कर रही है. 2016 में कांग्रेस ने मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर में 49 सीटों में से आधी से ज्यादा यानी कि 26 सीटें जीती थी जबकि 11 सीटें उसके सहयोगी लेफ्ट पार्टी को मिली थी. टीएमसी को महज 10 सीटों से संतोष करना पड़ा था. 2021 में सीन बदल गया था और टीएमसी ने कांग्रेस लेफ्ट का सफाया कर दिया था.
बंगाल की चुनावी जंग जिस तरह से टीएमसी और बीजेपी के बीच सिमटी है, उसके चलते कांग्रेस के लिए अपने सियासी वजूद बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. कांग्रेस ने 2016 में  इसी इलाके की सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी थी, जिसे एक बार फिर से दोहराने की कवायद में है. इसीलिए कांग्रेस ने अपने पुराने दिग्गजों को उतार है ताकि  टीएमसी और बीजेपी के सामने दो-दो हाथ कर सके. 
 
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News