कैराना। अब मामौर झील की पहचान गंदे पानी के जलाशय के कारण किसानों की फसलों के नुकसान के नाम से नहीं होगी। मामौर झील को प्रमुख इको-टूरिज्म (पर्यटन स्थल) के रूप में विकसित करने और उसके सौंदर्यीकरण के लिए खुदाई शुरू कर दी गई है। गत चार जून को उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शामली पहुंचकर करोड़ों रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया था। इसी दौरान मामौर झील को 251.75 लाख की लागत से पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की परियोजना की घोषणा की गई थी।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से कार्य शुरु कर दिया है। आवास विकास प्राधिकरण सहारनपुर के सहायक इंजीनियर गुफरान हुसैन ने बताया कि मामौर झील पर गेट, सुलभ शौचालय, कैंटीन, बैठने के लिए बेंचे, चारों ओर एक मीटर चौड़ी पक्की सड़क, हरी घास, पेड़ पौधे लगाए जाएंगे। झील को एक बड़े इको-टूरिज्म केन्द्र के रूप में बदला जाएगा, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सकें। इको-टूरिज्म बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकेंगे।
तहसीलदार अर्जुन चौहान ने बताया कि झील के आसपास कुछ किसानों के द्वारा अवैध कब्जे किए गए थे, जिनको खाली कराकर आवास विकास सहारनपुर के सुपुर्द कर दिया गया है।
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