Hanuman Lala Ki Aarti Lyrics: चैत्र मास की पूर्णिमा पर हर साल हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे हनुमान जयंती भी कहते हैं। इस बार ये पर्व 2 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन देश भर के हनुमान मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भक्त अपने आराध्या बजरंगबलि की पूजा करते हैं। इसके बाद आरती करने का विधान है। पूजा के बाद हनुमानजी की आरती कैसे करें, इसके लिए विशेष नियम है। आगे जानिए हनुमानजी की आरती के लिरिक्स और इसकी पूरी विधि…
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हनुमानजी की पूजा करने के बाद शुद्ध घी के दीपक से आरती करें। सबसे पहले हनुमानजी के चित्र के चरणों से 4 बार आरती की थाली घुमाएं, इसके बाद 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे पर से और 7 बार पूरे शरीर से। इस तरह कुल 14 बार आरती की थाली घूमानी चाहिए, ऐसा शास्त्रों में लिखा है। यही आरती की सही विधि है।
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आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरवर काँपे। रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की॥
लंका जारि असुर संहारे। सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे। लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें। जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥
जो हनुमानजी की आरती गावे। बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
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