Delhi News: AIIMS में नेत्रहीनों को मिले AI स्मार्ट चश्मे, अब आवाज के जरिए देख सकेंगे दुनिया – Zee News

Delhi AIIMS News:  दिल्ली AIIMS के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र (आरपी सेंटर) में एक नई पहल की गई है. यहां नेत्रहीन बच्चों और युवाओं को AI फीचर से लैस स्मार्ट विजन ऑप्टिकल्स (चश्मे) वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर खुशी साफ नजर आई.
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Delhi News: जब हम अपने आसपास किसी नेत्रहीन व्यक्ति या बच्चे को देखते हैं, तो अक्सर यह सवाल मन में आता है कि वे बिना आंखों के अपनी रोजमर्रा की जिंदगी कैसे जीते होंगे. खासकर एक जगह से दूसरी जगह अकेले यात्रा करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है. हालांकि, कई नेत्रहीन लोग सिर्फ एक स्टिक के सहारे आत्मनिर्भर होकर सफर करते हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जैसे सही दिशा का पता न चलना या पढ़ने-लिखने में परेशानी.

इन्हीं चुनौतियों को कम करने के लिए दिल्ली AIIMS के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र ((डॉ. आरपी सेंटर) में एक नई पहल की गई है. यहां नेत्रहीन बच्चों और युवाओं को AI फीचर से लैस स्मार्ट विजन ऑप्टिकल्स (चश्मे) वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर खुशी साफ नजर आई.

बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में कुल 40 स्मार्ट विजन ऑप्टिकल्स बांटे गए. ये चश्मे खासतौर पर उन लोगों के लिए हैं जिन्हें कम दिखाई देता है या बिल्कुल भी नहीं दिखता, लेकिन जिन्हें स्मार्टफोन चलाना आता है.

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इस बारे में जानकारी देते हुए प्रो. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि यह AI चश्मा सामने मौजूद वस्तुओं को स्कैन कर उन्हें ऑडियो में बदल देता है. यानी, उपयोगकर्ता बिना देखे सिर्फ सुनकर समझ सकता है कि उसके सामने क्या है.
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर कोई व्यक्ति नोट की पहचान करना चाहता है, तो वह चश्मे को नोट के सामने लाएगा और यह तुरंत उसे ऑडियो के जरिए बताएगा कि वह कितने रुपये का नोट है. इसी तरह, चलते समय यह चश्मा आसपास की वस्तुओं, रास्ते की रुकावटों और दिशा के बारे में भी जानकारी देता रहेगा.
इतना ही नहीं, यह चश्मा किताब या किसी भी लिखित सामग्री को स्कैन कर उसे ऑडियो में बदल देता है, जिससे नेत्रहीन व्यक्ति आसानी से पढ़ाई भी कर सकते हैं.
यह स्मार्ट चश्मा स्मार्टफोन से कनेक्ट होकर काम करता है और उपयोगकर्ता को लगभग “देखने जैसा अनुभव” देता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दृष्टिहीन बच्चों और युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे उनकी स्वतंत्रता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि होगी.
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(दिल्ली से हरि किशोर साह की रिपोर्ट)
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