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पनामा का झंडा लगाए चल रहा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) कैरियर ‘तारा गैस’ इन दिनों वैश्विक समुद्री गतिविधियों के बीच खास निगरानी में है. भारत से जुड़े इस जहाज ने होर्मुज पार करने के लिए ईरान द्वारा मंजूर रास्ता चुना है. जहाज अपने चालक दल और मालिकाना हक को भारतीय बता रहा है, लेकिन ईरान से जुड़े इसके इतिहास ने चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ‘तारा गैस’ को होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के लारक द्वीप के पास से गुजरते हुए देखा गया. समुद्री डेटा प्लेटफॉर्म ‘शिप एटलस’ के मुताबिक, जहाज का डेडवेट 53,208 MT है. यही वजह है कि इसे बड़े आकार के LPG कैरियर वर्ग में रखा जा रहा है. यह वही श्रेणी है, जिसमें ‘शिवालिक’ जैसे जहाज शामिल हैं, जो पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच चुके हैं.
आंकड़ें यह भी बताते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने और लारक द्वीप के पास पहुंचने से पहले ‘तारा गैस’ का आखिरी ज्ञात बंदरगाह संयुक्त अरब अमीरात का शारजाह एंकरेज था. इसके बाद जहाज ने ईरान की ओर से मंजूर समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया. अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि वो आगे बढ़कर ओमान की खाड़ी में प्रवेश करता है या नहीं.
यदि ऐसा होता है, तो उसके पूरे मार्ग पर करीबी निगरानी रखी जाएगी. इसकी एक बड़ी वजह ब्लूमबर्ग की वह रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि यह जहाज पहले भी ईरानी माल ढो चुका है. ऐसे में इसे अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी जहाजरानी को निशाना बनाने वाली नाकेबंदी से बचकर आगे निकलना होगा. इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता भी बढ़ गई है.
इसकी वजह ये है कि हाल के महीनों में होर्मुज लगातार तनाव का केंद्र बना हुआ है. 18 अप्रैल को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की गनबोट्स ने होर्मुज से गुजर रहे दो जहाजो ‘जग अर्णव’ और ‘सैनमार हेराल्ड’ पर गोलीबारी की थी. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी थी. इसका सीधा असर उर्जा जरूरतों पर है.
इसके बाद 2 मई को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा चार्टर किया गया LPG कैरियर ‘MT सर्व शक्ति’ दोहरी नाकेबंदी पार करके भारतीय तट तक पहुंचा था. उस घटना को भी क्षेत्रीय समुद्री तनाव के बीच बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा गया. जंग शुरू होने के बाद फारसी खाड़ी में फंसे कई जहाजों ने सुरक्षित रास्ता हासिल करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए हैं.
कुछ जहाजों ने AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिए, जबकि कई ने अपनी मंजिल के संकेत बदल दिए. इसके अलावा जहाजों को GPS जैमिंग और संभावित स्पूफिंग जैसी चुनौतियों के बीच भी गुजरना पड़ा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत, थाईलैंड और मलेशिया सहित कई देशों ने तेहरान के साथ कूटनीतिक चैनल भी खोले हैं. इन मकसद सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है.
इक्वासिस डेटाबेस के मुताबिक, ‘तारा गैस’ का मालिक ग्लोबल गैस इंक (Global Gas Inc.) है, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनी बताई गई है. वहीं, जहाज का प्रबंधन Matrix Maritime Solutions FZE के पास है. खास बात यह है कि उसका पता भी ग्लोबल गैस के पते से मेल खाता है. फिलहाल तारा गैस की हर गतिविधि पर अंतरराष्ट्रीय निगाहें टिकी हुई हैं.
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