Feedback
देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (UPSC Prelims 2026) का आयोजन 24 मई को हुआ, लेकिन परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर राहत के बजाय एक गहरा ‘शॉक’ साफ देखा जा सकता है. दिल्ली का कोचिंग हब कहा जाने वाला करोल बाग इस वक्त एक अघोषित सन्नाटे और अंतहीन चर्चाओं के दौर से गुजर रहा है. ग्राउंड ज़ीरो पर परीक्षा देकर लौटे अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि पूरी परीक्षा प्रणाली इस बार बेहद अनप्रेडिक्टेबल रही.
मेन्स के सवालों का तड़का और कॉपियों की लेंथ ने उड़ाए होश
करोल बाग में पिछले सात-आठ साल से तैयारी कर रहे एक सीनियर अभ्यर्थी ने बताया कि यह यूपीएससी के इतिहास का अब तक का सबसे टफेस्ट पेपर था. उनका कहना था कि देखते ही पहला रिएक्शन बेहद शॉकिंग रहा, क्योंकि इस बार पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (लोक प्रशासन) और एथिक्स जैसे मुख्य परीक्षा (Mains) के सिचुएशन-बेस्ड विषयों को प्रीलिम्स में ही घुसा दिया गया था.
एक अन्य अभ्यर्थी ने पेपर के लेंदी होने पर बात करते हुए कहा कि इस बार बुकलेट में पिछली बार से कम से कम 7-8 पेज ज्यादा थे और एक-एक पन्ने पर सिर्फ एक या दो सवाल ही छपे हुए थे. उन्होंने आशंका जताई कि इस कठिन स्तर के कारण इस बार परीक्षा का परिणाम बेहद चौंकाने वाला होगा और कट-ऑफ न्यूनतम स्तर पर जा सकती है.
इतिहास की अंधी सुरंग और ट्रेडिशनल सोर्सेज का फेल होना
परीक्षा के पैटर्न पर बात करते हुए एक तीसरे अभ्यर्थी ने कहा कि सारे ही सेक्शन डरावने थे. इतिहास ने इस तरीके से शॉक किया कि इसके डीप फैक्ट्स किसी भी स्टैंडर्ड किताब में ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं, यहाँ तक कि परीक्षा खत्म होने के बाद भी एक्सपर्ट्स सही ऑप्शन्स को लेकर कन्फ्यूज हैं. वहीं साइंस-टेक और पॉलिटी में बेहद गहरे रीजनिंग बेस्ड सवाल पूछे गए थे.
इस परीक्षा ने देश की भारी-भरकम कोचिंग इंडस्ट्री के दावों की भी पूरी तरह हवा निकाल दी है. एक अभ्यर्थी ने तीखे शब्दों में कहा कि लाखों रुपये देकर जो मॉक्स और टेस्ट सीरीज लगाई जाती हैं, उनका इस रीयल पेपर से कोई मुकाबला ही नहीं था. कोचिंग वाले पुराने ढर्रे पर पेपर बनाते हैं, जबकि यूपीएससी ने इस बार पूरा खेल ही बदल दिया. हालांकि, एक अन्य अभ्यर्थी ने थोड़ा व्यावहारिक नजरिया रखते हुए कहा कि कोचिंग इंडस्ट्री की सस्टेनेबिलिटी उन 99% बच्चों से ही आती है जो सिलेक्ट नहीं हो पाते, इसलिए कभी-कभी पेपर को सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा हाइप भी दे दिया जाता है.
CSAT बना ‘डिसक्वालिफाइंग’ पेपर, हिंदी मीडियम और आर्ट्स के छात्र पिछड़े
इस बार सामान्य अध्ययन (GS) के साथ-साथ सीसैट (CSAT) के पेपर ने भी छात्रों के आंसू निकाल दिए. आर्ट्स बैकग्राउंड के एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि सीसैट को सिर्फ क्वालिफाइंग कहा जाता है, लेकिन इसने आर्ट्स और हिंदी मीडियम के लड़कों को रेस से बाहर (डिसक्वालिफाई) करने का काम किया है. मैथ्स की कैलकुलेशन इतनी ज्यादा हाई थी कि निर्धारित समय में पेपर अटेम्प्ट कर पाना नामुमकिन था.
सबसे बड़ी मुसीबत ट्रांसलेशन (अनुवाद) को लेकर सामने आई. एक अभ्यर्थी ने बताया कि इंग्लिश से हिंदी में जो अनुवाद किया गया था, उसकी भाषा इतनी कठिन थी कि उन्हें एक ही पैराग्राफ को समझने के लिए बार-बार इंग्लिश और हिंदी दोनों वर्जन पढ़ने पड़ रहे थे, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद हो गया और अंत में कई सवाल छूट गए.
वहीं इंटरनेशनल रिलेशंस पर बात करते हुए एक अभ्यर्थी ने बताया कि इस बार दो साल पुराना करेंट अफेयर्स पूछा गया था, जहाँ COP-29 के बजाय COP-27 (जो कि काफी पुराना है) से जुड़े सवाल आए थे. ऑप्शन्स भी इतने इंटरलिंक्ड थे कि एलिमिनेशन करना नामुमकिन था.
क्या यूपीएससी सिलेबस बनाना भूल गया है?
एक महिला अभ्यर्थी ने बेहद तीखे तेवर अपनाते हुए सवाल खड़ा किया कि क्या यूपीएससी अपना सिलेबस बनाना ही भूल गया है? उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर साल पॉलिटी से 15 सवाल होते थे, इस बार सिर्फ 5-6 थे. इकोनॉमिक्स से सिर्फ 3-4 सवाल आए. उन्होंने साफ कहा कि अगर आर्ट्स के बच्चे यूपीएससी को नहीं चाहिए, तो उन्हें सीधे बोल देना चाहिए कि वे फॉर्म ही न भरें, ताकि युवाओं का साल बर्बाद न हो.
हालांकि, इस पूरे डरावने माहौल के बीच एक ऐसी महिला उम्मीदवार भी मिलीं जिन्होंने पहले मेन्स क्लियर किया है. उनका नजरिया थोड़ा सकारात्मक था. उन्होंने इसे एक ‘अच्छा एनालिटिकल पेपर’ बताते हुए कहा कि डायरेक्ट क्वेश्चंस काफी कम थे, इसलिए एनालिसिस के लिए टाइम लगना लाजिमी था. चूंकि यह यूपीएससी है, इसलिए इसका लेवल हमेशा हाई ही रहेगा और हमारी तैयारी भी उसी स्तर की होनी चाहिए.
85 से 87 अंक के बीच सिमटेगी कट-ऑफ?
पेपर के इस जानलेवा ढर्रे और सीसैट की जटिलता को देखते हुए करोल बाग के माहौल में यह तय माना जा रहा है कि इस बार मेरिट बहुत नीचे गिरने वाली है. अभ्यर्थियों के अनुसार, जनरल कैटगरी के लिए 85 से 87 अंक के बीच का स्कोर पूरी तरह से सेफ जोन हो सकता है. फिलहाल, इस अनसुलझी पहेली को सुलझाने में छात्र अब भी सोशल मीडिया से लेकर चाय की टपरियों तक माथापच्ची कर रहे हैं.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू