Ajab Gajab News: पाकिस्तान की एक प्रमुख संघीय सरकारी एजेंसी फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) के नए प्रस्ताव में यूट्यूबर्स पर उनके वीडियो व्यूज (कितनी बार वीडियो देखा गया) के आधार पर टैक्स लगाने की बात कही गई है. पाकिस्तान सरकार की योजना पर विवाद खड़ा हो गया है. आलोचकों का कहना है कि अगर सरकार सिर्फ व्यूज देखकर टैक्स लगाएगी, तो कई यूट्यूबर्स को अपनी वास्तविक कमाई से भी ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. मालदीव इनसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीआर के इस कदम से कानूनी मान्यता और ऑनलाइन मोनेटाइजेशन की सच्चाई के साथ एजेंसी के तालमेल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.
दरअसल आलोचकों का कहना है कि यूट्यूब पर ज्यादा व्यूज का मतलब हमेशा ज्यादा कमाई नहीं होता. उदाहरण के लिए अगर किसी यूट्यूबर के 10 लाख व्यूज हैं, लेकिन उसके वीडियो पर विज्ञापन कम चले, तो उसकी कमाई बहुत कम हो सकती है. वहीं किसी दूसरे यूट्यूबर के 10 लाख ही व्यूज हों, लेकिन उसके दर्शक अमेरिका या यूरोप जैसे देशों से हों, तो उसकी कमाई कई गुना ज्यादा हो सकती है. इसलिए टैक्स आय पर लगना चाहिए, सिर्फ व्यूज पर नहीं. सरकार वास्तविक आय की बजाय वीडियो व्यूज को टैक्स का आधार बना रही है, जिसे कई लोग अनुचित और अव्यावहारिक मान रहे हैं.
इस विवाद के केंद्र में कुछ विदेशी पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स के लिए टैक्सेशन 66 फीसदी तक पहुंचने की संभावना है. यह आंकड़ा ना सिर्फ एक आक्रामक वित्तीय रुख को दिखाता है, बल्कि पॉलिसी डिजाइन और डिजिटल इनकम जेनरेशन के तरीकों के बीच एक बुनियादी अंतर को भी दिखाता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यूट्यूब का रेवेन्यू मॉडल हर व्यू पर फिक्स्ड रेट पर काम नहीं करता है. क्रिएटर्स आमतौर पर अपने कंटेंट के साथ दिए गए विज्ञापन से कमाते हैं, जिसमें पेमेंट कॉस्ट पर मिल (सीपीएम) जैसे मेट्रिक्स पर कैलकुलेट किया जाता है, जो हर 1,000 व्यू पर कमाई दिखाता है.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘असल में, सीपीएम रेट अलग-अलग होते हैं. कई क्रिएटर्स के लिए कमाई 1 डॉलर प्रति 1,000 व्यूज जितनी कम हो सकती है, जबकि ज्यादा डिमांड वाले मार्केट में प्रीमियम कंटेंट के लिए रेट 30 डॉलर प्रति 1,000 व्यूज से ज्यादा हो सकते हैं. शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के लिए यह फर्क और भी ज्यादा है. उदाहरण के लिए, यूट्यूब शॉर्ट्स काफी कम रिटर्न देते हैं, जो अक्सर 0.4 डॉलर और 0.6 प्रति डॉलर 1,000 व्यूज के बीच होता है, जो प्लेटफॉर्म के अलग मोनेटाइजेशन स्ट्रक्चर को दिखाता है.’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यदि कराधान को वास्तविक आय के बजाय केवल व्यूज की संख्या से जोड़ा जाता है, तो ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें कर की देनदारी कमाई से भी अधिक हो जाए. ऐसे मामलों में प्रभावी कर दर ना केवल असंगत होगी, बल्कि वास्तविक आय से पूरी तरह अलग हो जाएगी.’ (एजेंसी इनपुट्स)
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Viral की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
इकराम मूल रूप से उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं मगर जन्म देश की राजधानी दिल्ली में हुआ. शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्कूल में हुई. इसी के साथ ज्ञान हासिल करने … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED