दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को बिजली खरीदने की ज्यादा लागत वसूलने के लिए सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दी थी। इसके कुछ दिनों बाद शनिवार को बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कारणों से ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते यह बदलाव जरूरी था।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार यह पक्का करेगी कि बढ़ती ऊर्जा लागत का बोझ दिल्ली के लोगों पर जरूरत से ज्यादा न पड़े। DERC द्वारा डिस्कॉम्स को सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी देने के बाद दिल्ली के लोगों के बिजली बिल में थोड़ी बढ़ोतरी होगी। इसका सबसे ज्यादा असर पूर्वी और मध्य दिल्ली के उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिन्हें BSES और BYPL बिजली सप्लाई करती है।
यह बढ़ोतरी फ्यूल एंड पावर परचेज़ एडजस्टमेंट सरचार्ज से जुड़ी है। यह एक ऐसा वेरिएबल चार्ज है जो बिजली वितरण कंपनियों को बिजली खरीदने की लागत में अचानक हुई बढ़ोतरी की भरपाई करने की सुविधा देता है। DERC ने बुधवार को अप्रैल 2026 के लिए सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दी। इसके पीछे ईंधन की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के कारण बिजली खरीद की लागत में हुई भारी बढ़ोतरी का हवाला दिया गया।
इस सिस्टम के बारे में बताते हुए बिजली मंत्री सूद ने कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह देश के बिजली कानूनों के तहत एक कानूनी प्रावधान है। यह प्रावधान डिस्कॉम को हर महीने ईंधन और बिजली खरीद की लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव के हिसाब से एडजस्टमेंट करने की सुविधा देता है। सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात और मौजूदा परिस्थितियों की वजह से ईंधन की लागत तेजी से बढ़ी है। इस वजह से पिछले महीने बिजली खरीदने की लागत में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार के समय पर दखल देने से यह सुनिश्चित हुआ कि ग्राहकों पर बोझ कम से कम रहे। उन्होंने कहा कि भले ही बिजली खरीदने की लागत 31 प्रतिशत बढ़ गई है, लेकिन सरचार्ज में औसतन सिर्फ 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की मंजूरी दी गई है। सूद ने बताया कि इस बदलाव से लगभग 74 लाख में से करीब 32.3 लाख उपभोक्ता प्रभावित नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि दिल्ली सरकार से बिजली सब्सिडी पाने वाले सभी उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर इस रेगुलेटरी एडजस्टमेंट का कोई असर नहीं पड़ेगा। सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मंत्री ने आरोप लगाया कि इस संबंध में भ्रम फैलाने और बेवजह की आशंकाएं पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार उपभोक्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है। खासकर उन लोगों के साथ जिन्हें बिजली सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
सूद ने यह भी बताया कि डीईआरसी के हालिया आदेश में डिस्कॉम के लिए रिकवरी को टालने जैसे प्रावधान शामिल हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर तुरंत पड़ने वाले असर को सीमित किया जा सके। उन्होंने कहा कि TPDDL से बिजली पाने वाले घरों पर लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा, जबकि सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ता भी इस बढ़ोतरी से अछूते रहेंगे।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के ‘डीडी न्यूज’ से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।
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