रांची, सवांददाता। अस्पतालों में आग लगने जैसी घटनाओं के दौरान मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने सोमवार को रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में आपदा प्रबंधन को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की। इस दौरान आग लगने की स्थिति में बचाव और राहत कार्यों की तैयारियों को परखा गया। मॉक ड्रिल के दौरान अचानक आपातकालीन अलार्म बजाया गया। कर्मचारियों ने मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, घायलों को रेस्क्यू करने और अग्निशमन उपकरणों के इस्तेमाल का अभ्यास किया। इस पूरी प्रक्रिया में अस्पताल के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
रिम्स के एएमएस डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने कहा कि अस्पताल में हजारों मरीज और उनके परिजन आते-जाते हैं। ऐसे में केवल बेहतर इलाज ही नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी अस्पताल की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नियमित मॉक ड्रिल से कर्मचारियों को आपात स्थिति में सही निर्णय लेने और तेजी से कार्रवाई करने का प्रशिक्षण मिलता है। उन्होंने बताया कि रिम्स में समय-समय पर अलग-अलग विभागों में इस तरह के अभ्यास कराए जाते हैं, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके। मॉक ड्रिल में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि पहले उन्हें आपदा की स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी सीमित थी, लेकिन इस अभ्यास से उन्हें मरीजों की सुरक्षा और खुद के बचाव के कई महत्वपूर्ण तरीके सीखने को मिले। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर इस तरह के प्रशिक्षण आगे भी जारी रहेंगे।
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