डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम ने कहा कि राज्य में मछलीपालन और पशुपालन से पलायन रुकेगा। इससे बेरोजगारी कम होगी। राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 में मछली उत्पादन बढ़ कर 10 लाख 28 हजार टन हो गया है। इसे और बढ़ाना है। मंगलवार को मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन में समग्र मात्स्यिकी विकास सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि राज्य में 7,990 हेक्टेयर नए जल क्षेत्र 2,721 हेक्टेयर चौर भूमि में आधुनिक तालाब निर्माण और 5,264 ट्यूबवेल लगाए गए हैं। राज्य में 233 मत्स्य बीज हैचरी है। इससे 70 फीसदी आवश्यकता पूरी होती है।
2025-26 में 2753 मिलियन मछली बीज का उत्पादन हुआ है। राज्य में स्थापित 89 फिश फीड मिलों से 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन राज्य के अंदर होने लगा है। अब तक 6,449 वाहन एवं 12,172 मत्स्य विपणन किट का वितरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के चिह्नित 3 प्रखंडों व 7 पंचायतों में आधुनिक मत्स्य बाजारों का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विभाग की तरह मछली पालकों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि मछली पालन को व्यवसाय की तरह विकसित करने की जरूरत है। हम निर्यात बढ़ा कर मछलीपालकों की आय बढ़ा सकते हैं। इसके लिए प्रोसेसिंग प्लांट, फिश फीड मिल और बायोफ्लॉक आदि योजनाएं हैं। राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के सीईओ डॉ. विजय कुमार बेहरा ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि बिहार नंबर एक मछली उत्पादक राज्य बनाना है। एक हेक्टेयर में धान से 25 हजार सालाना आय होती है, जबकि मछली से 5 लाख तक आय हो सकती है। मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला स्वागत और मत्स्य संयुक्त निदेशक दिलीप कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में विभाग के संयुक्त निदेशक कुमार रवीन्द्र, एनसीडीसी के क्षेत्रीय निदेशक अनिरुद्ध सिंह, नाबार्ड के जीएम पार्थ मंडल सहित विभिन्न जिलों के मछली उत्पादक किसान मौजूद थे।
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