डील के बाद अब होर्मुज में क्या चल रहा है, शिप के लाइव ट्रैकर में देखिए कितने जहाज गुजर रहे हैं, कितने वेटिंग में हैं – AajTak

अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी शांति समझौते पर साइन होने के बाद से रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों का आवाजाही शुरू हो गई है. हालांकि, इस जल मार्ग को क्रॉस करने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम है. लेकिन वैश्विक व्यापारिक बेड़े के 500  से 1500 फंसे हुए जहाजों का एक बड़ा हिस्सा अभी-भी अपनी पुरानी पोजीशन में स्थिर बना हुआ है.

लाइव ट्रैकर डेटा विश्लेषण से तनाव धीरे-धीरे कम होने के तीन प्रमुख संकेत मिले हैं, जिसमें ईरानी तेल टैंकरों द्वारा ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पार करना और दर्जनों बड़े टैंकरों का होर्मुज के पूर्वी हिस्से में स्थित बंदरगाहों के पास जमा होना शामिल है.
ट्रैकर के आकलन से पता चला है कि वैश्विक व्यापारिक बेड़े के 500 से 1500 फंसे हुए जहाजों का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी-भी अपनी पुरानी पोजीशन पर स्थिर बना हुआ है.
क्लीयरेंस का इंतजार

ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रैक्स के विश्लेषण से पता चला है कि भारत से जुड़े कई जहाज शुरुआती हलचल दिखाने के बाद अब शारजाह के तट के पास एक होल्डिंग पैटर्न में चले गए हैं. इन जहाजों की गतिविधियों से ये साफ संकेत मिलता है कि जहाज पर मौजूद स्टाफ इस रास्ते को पार करने से पहले औपचारिक रूप से समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद भी कूटनीतिक क्लीयरेंस मिलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान के MoU पर हस्ताक्षर करने के दौरान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग को पूरी तरह से खोलने के वादे के बीच माल्टा के ध्वज वाले गैस टैंकर ‘दिशा’ समेत कुछ भारतीय और ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों ने सफलतापूर्वक इस पूर्व नाकेबंदी रेखा को पार किया है.
इस क्षेत्र में मौजूद है 23 भारतीय जहाज

इसी बीच ‘इंडिया टुडे’ की ओसिंट (OSINT) टीम ने व्यापक खाड़ी क्षेत्र में 23 भारतीय झंडे वाले जहाजों को ट्रैक किया है, इनमें से 9 जहाज होर्मुज से पश्चिम में फारस की खाड़ी के अंदर हैं, जबकि 8 जहाज पूर्वी तरफ फुजैराह-खोर फक्कान क्षेत्र में हैं. फारस की खाड़ी के अंदर फंसे प्रमुख भारतीय टैंकरों में देश वैभव, देश सुरक्षा, संमार सुपर्णा और जग पवित्र शामिल हैं.

इन जहाजों की वहां उपस्थिति साफ दिखाती है कि सीमित आवाजाही शुरू होने के शुरुआती संकेतों के बावजूद भारतीय ध्वज वाले जहाजों का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी-भी इस खतरनाक चोकपॉइंट के पीछे ही सुरक्षित कूटनीतिक क्लीयरेंस का इंतजार कर रहा है.
होर्मुज पर अभी-भी संकट

भले ही जलमार्ग से जहाजों का आवागमन बेहद धीमी रफ्तार से शुरू हो गया है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रबंधन और नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच भारी विवाद अभी-भी बना हुआ है, क्योंकि दोनों देशों के बीच आधिकारिक तौर पर साइन किए गए 14 पॉइंट्स वाले MoU में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फिलहाल तो कोई टोल लगाने का जिक्र नहीं है. लेकिन इसमें भविष्य में टोल लगाने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया गया है.

उधर, ईरान इस जलमार्ग पर अपना पूर्ण अधिकार जताने की कोशिश कर रहा है और उसने मांग की है कि सभी जहाजों को अपने रूट तय करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ समन्वय करना होगा, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बनाए रखने पर अड़े हैं.

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