गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। जाम कंधों की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की खबर है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सर्जरी से इलाज हो रहा है। इसका रिजल्ट इतना सटीक मिला कि चिकित्सक इस तकनीक पर शोध करने लगे हैं। हड्डीरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमित मिश्रा के नेतृत्व में इस तकनीक पर रिसर्च शुरू हुआ है। डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि जाम हुए कंधे को एडहेसिव कैप्सुलाइटिस कहते हैं। इसे सामान्य भाषा में फ्रोजन शोल्डर कहा जाता है। डायबिटीज, चोट अथवा लंबे समय तक कंधे की निष्क्रियता के कारण होने वाली बीमारी है। इस बीमारी में कंधे के जोड़ के आसपास की कैप्सूल सिकुड़ जाती है। इससे कंधे की गतिशीलता अत्यधिक सीमित हो जाती है। फ्रोजन शोल्डर का इलाज दो चरणों में होता है। पहले चरण में दवा एवं फिजियोथेरेपी से इलाज किया जाता है।
करीब 70 फीसदी मरीजों में दवा और कसरत से फ्रोजन शोल्डर ठीक हो जाता है। जिन मरीजों में इससे लाभ नहीं मिलता ऐसे मरीजों को सर्जरी का विकल्प दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इसे आर्थ्रोस्कोपिक कैप्सुलर रिलीज कहते हैं। इसमें कंधे के जोड़ पर बने कैप्सूल को दूरबीन विधि से मुक्त कराया जाता है। इस तकनीक में छोटे चीरे के माध्यम से कैमरे एवं विशेष उपकरणों की सहायता से कंधे के अंदर की जकड़न को दूर किया जाता है। जिससे मरीज को दर्द से फौरन राहत मिलती है। इससे कंधे की कार्यक्षमता एक बार फिर लौट आती है।
अब तक छह मरीजों की सर्जरी इस तकनीक से की गई। इसमें चार पुरुष व दो महिलाएं शामिल हैं। सभी में 100 फीसदी सटीक परिणाम मिले। ऐसे में मेडिकल कालेज में इस तकनीक के परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन एवं शोध भी किया जा रहा है। शोध का उद्देश्य इस आधुनिक सर्जरी की प्रभाव तथा दीर्घकालिक परिणामों का मूल्यांकन करना है। सर्जरी के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। इसके लिए मरीजों का चयन जारी है।
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