रिपोर्ट : मानसून की धीमी रफ्तार से खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर – Live Hindustan

मानसून में देरी के कारण कुल खरीफ बुआई पिछले साल के मुकाबले 3.9 फीसदी कम दाल में 43.2 फीसदी की भारी गिरावट
17 जून, 2026 तक देश में कुल 46.2 मिमी बारिश दर्ज की गई
नई दिल्ली, एजेंसी। मानसून की धीमी रफ्तार की वजह से खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़नेवाला है। पिछले साल के मुकाबले फसलों की बुआई में करीब चार फीसदी की कमी हो चुकी है, अगर स्थिति नहीं सुधरी तो आनेवाले समय में हालात और खराब होंगे। थ्रीसिक्सटीवन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहती है, तो खाने-पीने की चीजों की कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की शुरुआत कमजोर रही है और देश के बड़े हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है।
मॉनसून के धीरे-धीरे आगे बढ़ने का असर खेती-बाड़ी पर पड़ने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जून तक खरीफ की कुल बुआई 84.6 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई, यह पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 3.9 प्रतिशत कम है। दालों और कपास की बुआई में सबसे अधिक गिरावट आई है। इनके बुआई क्षेत्र में क्रमशः 43.2 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि,चावल की बुआई में मजबूती दिखी है और इसमें पिछले साल के मुकाबले 28.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 17 जून तक कुल बारिश 46.2 मिमी दर्ज की गई, जबकि सामान्य स्तर 74.3 मिमी बारिश होती है। यानी बारिश में 38 प्रतिशत की कमी हुई। 17 जून को खत्म हुए हफ्ते में बारिश लंबे समय के औसत से 48 प्रतिशत कम रही।
देश के 66 फीसदी हिस्से सूखे
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सीजन में अब तक भारत के 36 मौसम संबंधी उप-क्षेत्रों में से 22 में कम बारिश हुई है। जिले के स्तर पर देखें तो देश के लगभग 66 प्रतिशत हिस्से में बहुत कम या कम बारिश हुई है। मध्य भारत पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है, जहां बारिश में 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि पूर्वी भारत में बारिश सामान्य से 44 प्रतिशत कम रही है।
बारिश की रफ्तार धीमी होने के बावजूद, जलाशयों में पानी का पर्याप्त स्तर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 11 जून तक जलाशयों में मौजूद पानी की मात्रा कुल क्षमता का 28.3 प्रतिशत थी, यह 10 साल के औसत से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। अगर आने वाले समय में बारिश असमान रहती है, तो यह सिंचाई की जरूरतों के लिए जरूरी बफर का काम करेगा।
रिसर्च के अनुसार, मॉनसून के मौजूदा पैटर्न पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि इसका असर कृषि उत्पादन, ग्रामीण आय और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ेगा। हालांकि इस सीजन की शुरुआत सामान्य से काफी कम बारिश के साथ हुई है, लेकिन इसका असल असर जुलाई-अगस्त की अहम अवधि में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगा, क्योंकि भारत में सीजन की ज्यादातर बारिश इसी दौरान होती है। अगर बारिश में सुधार होता है तो फसलों की स्थिति बेहतर हो सकती है, जबकि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो खाद्य पदार्थों की कीमतों और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है।
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