चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) ने 'वंदे मातरम' के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से शिक्षकों और …और पढ़ें
शिक्षक व शोधार्थी 19 जुलाई तक भेज सकते हैं आलेख।
उद्देश्य ‘वंदे मातरम’ का महत्व नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
जागरण संवाददाता, मेरठ। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने शिक्षकों और शोधार्थियों से शोध आलेख एवं लेख आमंत्रित किए हैं। ये आलेख हिंदी दिवस-2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के अवसर पर प्रकाशित होने वाली राष्ट्रीय स्मारिका में शामिल किए जाएंगे। इस वर्ष स्मारिका का केंद्रीय विषय ‘वंदे मातरम’ रखा गया है।
विश्वविद्यालय की साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद की ओर से कुलपति के निर्देश पर सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर शिक्षकों एवं शोधार्थियों से निर्धारित विषयों पर सरल, सहज और शोधपरक हिंदी में लेख भेजने का आग्रह किया गया है। परिषद की अध्यक्ष प्रो. नीलू जैन गुप्ता और समन्वयक प्रो. कृष्ण कांत शर्मा ने बताया कि स्मारिका का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ के विभिन्न आयामों को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना है।
राजभाषा विभाग के सहयोग से 14 और 15 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के नवी मुंबई में माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में हिंदी दिवस एवं छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन आयोजित होगा। इसी अवसर पर यह विशेष स्मारिका प्रकाशित की जाएगी।
परिषद ने लेखन के लिए 12 विषय निर्धारित किए हैं। इनमें ‘स्वाधीनता आंदोलन में वंदे मातरम की प्रेरक भूमिका’ को सबसे महत्वपूर्ण और समसामयिक विषय माना गया है। इसके अलावा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व, भारतीय भाषाओं में ‘वंदे मातरम’ की अभिव्यक्ति, भारतीय संस्कृति में इसका स्थान और वर्तमान युवा पीढ़ी के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता जैसे विषय भी शामिल हैं।
लेख यूनिकोड फान्ट में टाइप किए गए होने चाहिए। सामान्य लेखों की अधिकतम शब्द सीमा 3,000 और शोध आलेखों की 5,000 शब्द निर्धारित की गई है। हर लेखक को अपने लेख के साथ स्व-हस्ताक्षरित मौलिकता प्रमाणपत्र, नाम, पता, ई-मेल, फोटो और संपर्क विवरण भी भेजना होगा। प्रकाशित होने वाले लेखों के चयन का अंतिम निर्णय राजभाषा विभाग का होगा और कापीराइट भी उसी के पास रहेगा।
विश्वविद्यालय ने इच्छुक शिक्षकों और शोधार्थियों से 19 जुलाई तक अपने आलेख साहित्यिक-सांस्कृतिक परिषद की ई-मेल आइडी sahityiksanskritikparishad@gmail.com पर भेजने का अनुरोध किया है।