एआई और डिजिटल मानविकी पर वैश्विक मंथन शुरू – Live Hindustan

मुंगेर, हिन्दुस्तान संवाददाता। मुंगेर विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई एसकेआर कॉलेज, बरबीघा में विश्व लेखक एवं शोधकर्ता संघ (डब्ल्यूएएआर) के सहयोग से शनिवार को दो दिवसीय द्वितीय अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। टेक्नोलॉजिकल एडवांस एंड इंग्लिश स्टडीज विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, साहित्यकारों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता ने उद्घाटन सत्र को वैश्विक अकादमिक संवाद का स्वरूप प्रदान किया। सम्मेलन का उद्घाटन मुंगेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. लिशा सिन्हा ने किया।
कुलपति प्रो. संजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय उच्च शिक्षा को बहुविषयक, अनुसंधान-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल मानविकी और अन्य उभरती तकनीकों का विवेकपूर्ण एवं नैतिक उपयोग ही भविष्य की शिक्षा और शोध की आधारशिला बनेगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अध्ययन अब केवल साहित्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल संस्कृति, भाषा प्रौद्योगिकी, डेटा विश्लेषण और वैश्विक संचार जैसे नए क्षेत्रों से गहराई से जुड़ चुका है। कुलपति ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देने का आह्वान किया।
एआई शोध और शिक्षण को बना सकता है अधिक प्रभावी: द इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी (ईएफएलयू), हैदराबाद की डॉ. क्षेमा जोस ने मुख्य व्याख्यान में अंग्रेजी अध्ययन, डिजिटल मानविकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बदलते संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षण और शोध की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है, लेकिन आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और मानवीय संवेदनशीलता का कोई विकल्प नहीं हो सकता। सम्मेलन के संयोजक सह मुंगेर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. भवेशचंद्र पाण्डेय ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता,.digital प्रौद्योगिकी और मानवीय अध्ययन के बीच बढ़ता संवाद शिक्षा एवं शोध की नई संभावनाओं का द्वार खोल रहा है। यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। विश्व लेखक एवं शोधकर्ता संघ के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार राय ने संगठन की वैश्विक गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि आज ऐसी शोध संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है, जो सीमाओं से परे जाकर ज्ञान के अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को मजबूत बनाए। एसकेआर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को अपनी प्राथमिकता बनानी होगी।
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