पटना हाई कोर्ट ने मीडिया की रिपोर्टिंग को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों की तथ्यात्मक जानकारी प्रकाशित करना मीडिया का अधिकार है, लेकिन किसी आरोपी को मुकदमे से पहले ही मास्टरमाइंड, स्कैमस्टर, किंगपिन या ऐसे किसी अन्य शब्द से संबोधित नहीं किया जा सकता, जिससे यह संदेश जाए कि वह दोषी है। जज अंसुल ने आदेश में कहा कि मीडिया ट्रायल किसी भी व्यक्ति के निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी सक्षम न्यायालय की ओर से दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक किसी व्यक्ति की छवि को इस प्रकार धूमिल करना मानहानिकारक, अनैतिक और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कृत्य हो सकता है। अदालत ने कहा कि विचाराधीन मामलों में पहले से दोष तय करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यह आदेश रिशु श्री बनाम बिहार राज्य मामले की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। रिशु ने बिहार स्पेशल विजिलेंस यूनिट की ओर से टेंडर घोटाले में दर्ज FIR को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील नंदिता राव ने अदालत को बताया कि एफआईआर 30 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी, जबकि उनके मुवक्किल के घर पर छापेमारी 27 मई 2026 को की गई और उसी दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनका कहना था कि तलाशी के दौरान कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बावजूद टीवी चैनलों, समाचार पत्रों, ऑनलाइन पोर्टलों और सोशल मीडिया पर उन्हें पहले ही दोषी के रूप में पेश किया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि प्राइम-टाइम टीवी बहसों में उन्हें कठघरे में खड़ा किया गया, जिससे निष्पक्ष सुनवाई और संभावित गवाहों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद विभिन्न समाचार रिपोर्टों को देखा, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय की जांच, टेंडर घोटाले से जुड़े छापों और रिशु श्री की ओर से कमीशन के जरिए सरकारी ठेके हासिल करने के नेटवर्क जैसे दावों का उल्लेख था। अदालत ने कहा कि ऐसी सामग्री सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से प्रसारित हुई, जिसमें मुकदमा शुरू होने से पहले ही याचिकाकर्ता को दोषी घोषित किया जा रहा था। न्यायालय ने याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रेस की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और उस पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लागू होते हैं। हालांकि अदालत ने मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया, लेकिन गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया।
पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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