बिज़नेस
स्पोर्ट्स
राज्यों से
शहरों से
मिसाल बेमिसाल
लाइफस्टाइल
मनोरंजन जगत
राजनीति
धर्म
सन 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट के अपहरण, यातना और हत्या के बहुचर्चित मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी ने छत्तीस वर्ष बाद एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सात सौ सैंतीस पन्नों का आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। इस मामले में प्रतिबंधित संगठन जेकेएलएफ के तत्कालीन मुख्य कमांडर मोहम्मद यासीन मलिक और उसके चार साथियों को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। हम आपको याद दिला दें कि लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़े इस मामले की जांच को वर्ष 2024 में विधानसभा चुनावों से लगभग छह महीने पहले फिर से खोला गया था। अब आरोप पत्र दाखिल होने के साथ इस बहुचर्चित हत्याकांड में न्याय की उम्मीद फिर से मजबूत हुई है।
राज्य जांच एजेंसी ने यह आरोप पत्र श्रीनगर की विशेष अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में दाखिल किया है, जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी तथा टाडा और आतंकवाद निरोधक कानूनों से संबंधित मामलों की सुनवाई होती है। जांच एजेंसी के अनुसार मोहम्मद यासीन मलिक ने अपने सहयोगियों खुरशीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू को सरला भट के अपहरण और हत्या को अंजाम देने का निर्देश दिया था।
हम आपको बता दें कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की निवासी सरला भट श्रीनगर स्थित शेर ए कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान के नवजात शिशु विभाग में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत थीं। उस दौर में घाटी में आतंकवाद तेजी से फैल रहा था और कश्मीरी पंडित समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा था। भय और हिंसा के माहौल के बावजूद सरला भट उन चुनिंदा कश्मीरी पंडितों में शामिल थीं जिन्होंने घाटी नहीं छोड़ी और वहीं रहने का निर्णय लिया।
आरोप पत्र के अनुसार अठारह अप्रैल 1990 को सरला भट का सरकारी छात्रावास हब्बा खातून हॉस्टल से अपहरण कर लिया गया। जांच में सामने आया है कि उन्हें इलाहीबाग और लाल बाजार क्षेत्र में ले जाया गया, जहां उन्हें कई बार अमानवीय यातनाएं दी गईं। बाद में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। अगले दिन उनका क्षत विक्षत और गोलियों से छलनी शव श्रीनगर के पुराने इलाके उमर कालोनी मलाबाग में बरामद हुआ। शव के पास एक पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें सुरक्षा बलों का मुखबिर बताया गया था।
हालांकि राज्य जांच एजेंसी ने अपनी जांच में इस आरोप को पूरी तरह मनगढंत और सुनियोजित हत्या को उचित ठहराने का बहाना बताया है। एजेंसी का कहना है कि सरला भट के खिलाफ मुखबिरी का आरोप केवल हत्या को वैध ठहराने के लिए गढ़ा गया था। जांच एजेंसी ने इस आरोप पत्र को दशकों से न्याय से वंचित रही एक पीड़िता की स्मृति को समर्पित बताते हुए कहा कि यह कानून के शासन की पुनः पुष्टि और आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश है।
हम आपको बता दें कि मामले में नामजद आरोपियों में से तीन की मुकदमा शुरू होने से पहले ही मृत्यु हो चुकी है। जांच एजेंसी ने इस मामले में छत्तीस वर्ष की देरी के लिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों द्वारा पैदा किए गए भय और धमकी के वातावरण को जिम्मेदार ठहराया है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि पिछले तीन दशकों तक आतंकवादी गतिविधियों के कारण गवाह खुलकर सामने नहीं आ सके और न ही वे महत्वपूर्ण तथ्य साझा कर पाए।
वर्तमान में मोहम्मद यासीन मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक अन्य आतंकवाद संबंधी मामले में न्यायिक हिरासत में बंद है। वहीं खुरशीद अहमद चाल्कू, जिस पर गोली चलाने का आरोप है, अब भी फरार बताया जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार उसके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भाग जाने की आशंका है। उसके खिलाफ उद्घोषणा संबंधी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
राज्य जांच एजेंसी ने आरोप पत्र में भारतीय दंड संहिता और तत्कालीन रणबीर दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ टाडा और भारतीय आयुध अधिनियम की धाराएं भी लगाई हैं। इनमें अपहरण, गैरकानूनी रोकथाम, हत्या, साजिश रचना, सबूत मिटाने और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े अपराध शामिल हैं।
जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले में दशकों के दौरान एकत्र किए गए मौखिक, दस्तावेजी, वैज्ञानिक, बैलिस्टिक, चिकित्सकीय और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया है। एजेंसी ने इसे एक मजबूत और व्यापक साक्ष्य संग्रह बताया है, जिसके आधार पर आरोप पत्र तैयार किया गई है।
देखा जाये तो यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि उस दौर की त्रासदी का प्रतीक माना जा रहा है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद और भय का माहौल चरम पर था। सरला भट की हत्या ने उस समय कश्मीरी पंडित समुदाय में गहरी दहशत पैदा की थी। अब इतने वर्षों बाद इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के आगे बढ़ने से पीड़ित परिवारों और समाज के एक वर्ग में यह उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित मामलों में भी न्याय की राह खुल सकती है।
Tags
अन्य न्यूज़
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में यह घोषणा की और कहा कि प्रस्तावित बदलाव मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान पेश किए जाएंगे। यह कदम उन चिंताओं के बीच उठाया गया है कि कई डांस बार ऑपरेटर मौजूदा डांस बार कानून के तहत तय सख्त शर्तों से बचने के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लाइसेंस ले रहे हैं।
Quick Links
प्रभासाक्षी.कॉम पर आपको मिलेंगे देश-दुनिया के ताज़ा समाचार हिंदी में, Get all the Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, Videos in Hindi, Hindi News Live, Hindi News on prabhasakshi.com
आप हमें फॉलो भी कर सकते है
हमसे सम्पर्क करें