Pahalgam Cloudburst: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम मार्ग पर शनिवार देर शाम बादल फटने से भारी नुकसान हुआ. तेज पानी और मलबे की वजह से बिजबेहड़ा-पहलगाम सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया, जिससे इस रास्ते पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है. प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया. फिलहाल प्रभावित इलाके में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है और मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बादल फटने के बाद कई जगह सड़कें टूट गईं और कुछ हिस्सों में भारी मलबा जमा हो गया. इससे आसपास के गांवों और पर्यटन स्थलों का संपर्क भी टूट गया. कई इलाकों में बिजली और पेयजल की सप्लाई भी बंद हो गई है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है. मौसम सामान्य होते ही सड़क की मरम्मत, बिजली और पानी की सप्लाई बहाल करने का काम शुरू किया जाएगा. स्थानीय लोगों ने भी जल्द राहत और जरूरी सेवाएं बहाल करने की मांग की है ताकि सामान्य जीवन फिर से पटरी पर लौट सके. इस स्टोरी में हम आपको बता रहे हैं कि बादल क्यों फटता है और क्या है इसके पीछे का साइंस…
#WATCH | Jammu & Kashmir | The flash flood following a cloudburst at the Nalla Awoora area of Pahalgam in South Kashmir causes massive wreckage, debris pileup, and large pools of stagnant water. pic.twitter.com/I54qzVVLzf
— ANI (@ANI) July 12, 2026
बादल फटना तब होता है, जब बहुत कम समय में एक छोटे इलाके के ऊपर बेहद ज्यादा मात्रा में बारिश हो जाती है. पहाड़ों में नमी से भरी हवाएं ऊंची चोटियों से टकराकर तेजी से ऊपर उठती हैं. ऊपर पहुंचकर ये हवाएं ठंडी हो जाती हैं और उनमें मौजूद जलवाष्प तेजी से पानी की बूंदों में बदलने लगती है. जब बादल में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है और वह उसे संभाल नहीं पाता, तब अचानक बहुत तेज बारिश शुरू हो जाती है. इसी घटना को क्लाउडबर्स्ट या बादल फटना कहा जाता है. इसमें कुछ मिनटों में ही इतनी बारिश हो सकती है, जितनी सामान्य तौर पर कई घंटों में होती है.
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बादल फटने की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं. इसकी वजह वहां की ऊंची पहाड़ियां और मौसम की खास स्थिति होती है. नमी वाली हवाएं पहाड़ों से टकराकर अचानक ऊपर उठती हैं, जिससे भारी बारिश वाले बादल तेजी से बनते हैं. अगर हवा की रफ्तार कम हो और बादल एक ही जगह पर लंबे समय तक ठहर जाए, तो बहुत कम इलाके में तेज बारिश होने लगती है. यही पानी अचानक बाढ़, भूस्खलन और मलबे का कारण बनता है. इसलिए मौसम विभाग ऐसे समय में लोगों को नदी-नालों और पहाड़ी रास्तों से दूर रहने की सलाह देता है.
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ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. वे मई 2024 से Zee Media समूह के साथ जुड़े हैं. यहां … और पढ़ें
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