राजस्थान में 57 करोड़ का 'गौ-अनुदान घोटाला'! मरी हुई गायों के नाम पर भी उठता रहा सरकारी पैसा, AG रिपोर्ट से बड़ा खुलासा – AajTak

Feedback
राजस्थान में गोवंश संरक्षण के नाम पर सरकारी अनुदान के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. महालेखाकार (AG) की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2023-24 के दौरान कई गोशालाओं को ऐसे गोवंश के नाम पर भी सरकारी अनुदान जारी कर दिया गया, जिनकी मौत हो चुकी थी या जो पूरी अनुदान अवधि के दौरान गोशालाओं में मौजूद ही नहीं थे. इस खुलासे के बाद सरकारी व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की कई गोशालाओं ने वास्तविक संख्या से कहीं अधिक गोवंश दिखाकर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का अनुदान प्राप्त किया. जांच में यह भी सामने आया कि दैनिक गोवंश विवरण और भारत पशुधन ऐप में दर्ज आंकड़ों में भारी अंतर होने के बावजूद संबंधित रिकॉर्ड का उचित सत्यापन नहीं किया गया और अनुदान जारी होता रहा.
यह भी पढ़ें: राजस्थान: भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 और बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत से हड़कंप, जयपुर से एक्सपर्ट टीम जांच को रवाना
महालेखाकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनवैलिड, इनएक्टिव और बिना पंजीकृत टैग वाले गोवंश पर भी अनुदान का भुगतान किया गया. बड़े गोवंश के लिए प्रतिदिन 40 रुपये और छोटे गोवंश के लिए 20 रुपये की दर से सरकारी राशि जारी की गई, जिससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो गया.
38 गोशालाओं पर अतिरिक्त अनुदान लेने का आरोप
जांच के दौरान सामने आया कि राजस्थान की 38 गोशालाओं ने आवेदन में करीब 1.31 लाख गोवंश वास्तविक संख्या से अधिक दर्शाए. इसी आधार पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त अनुदान जारी किया गया. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में ऐसी गायों के नाम पर भी भुगतान हुआ जो या तो मर चुकी थीं या फिर गोशालाओं में मौजूद ही नहीं थीं.
जयपुर
रिपोर्ट में जयपुर की पिंजरापोल गोशाला पर करीब 1.81 करोड़ रुपये अतिरिक्त अनुदान लेने का उल्लेख किया गया है. वहीं हिंगोनिया गोशाला को भी लगभग 1.41 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि जारी होने की बात सामने आई है.
सबसे बड़ी वित्तीय अनियमितता डीग जिले की श्री ब्रज कामद सुरभि वन शोध संस्थान गोशाला में दर्ज की गई है. रिपोर्ट के अनुसार इस गोशाला को करीब 16.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त अनुदान जारी हुआ. इसके अलावा जालौर की श्री गोपाल गोवर्धन गौशाला, पथमेड़ा को करीब 10.95 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने का मामला भी सामने आया है. रिपोर्ट में भरतपुर की तीन और सीकर की छह गोशालाओं का भी उल्लेख किया गया है.
जयपुर
57.36 करोड़ की रिकवरी के आदेश, फिर भी नहीं लौटी रकम
महालेखाकार की रिपोर्ट के आधार पर गोपालन विभाग ने संबंधित 38 गोशालाओं से कुल 57.36 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश जारी किए हैं. गोपालन निदेशालय ने 29 मई 2026 को सभी संबंधित गोशालाओं को नोटिस भेजकर निर्धारित समय के भीतर राशि जमा कराने के निर्देश दिए थे.
नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि तय समय में राशि जमा नहीं कराई गई तो संबंधित गोशालाओं की आगामी प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां रोक दी जाएंगी. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक तीन-तीन बार रिकवरी के आदेश जारी होने के बावजूद अब तक करोड़ों रुपये की वसूली नहीं हो सकी है.
जयपुर
इस पूरे मामले पर गोशाला संचालकों ने अपना पक्ष भी रखा है. उनका कहना है कि यह फर्जी अनुदान लेने का मामला नहीं है, बल्कि दस्तावेजों और रिकॉर्ड में कुछ कमियां थीं. उनका दावा है कि संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण जांच समिति को सौंप दिए गए हैं और जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. फिलहाल Accountant General (AG) रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे मामले ने प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News