वाराणसी, संवाददाता। हिंदी साहित्य के उत्थान में नागरी प्रचारिणी सभा ने अविस्मरणीय योगदान किया है। इस इमारत की एक-एक ईंट हिंदी सेवियों के अनन्य योगदान की गवाह हैं। ये बातें बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहीं। वह सभा के स्थापना दिवस उत्सव के दूसरे दिन आयोजित प्रदर्शनी एवं विथिका का उद्घाटन करने के बाद बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बीएचयू और सभा को साथ मिलकर बड़ी परियोजनाएं हाथ में लेनी चाहिए। दोनों के संग्रहालयों में उपलब्ध वस्तुओं और हस्तलेखों की प्रतिकृतियां दोनों संस्थाओं के पास होनी चाहिए। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा, यह जानकर मुझे खास अपनापन का अनुभव हो रहा है कि 1950 के पहले तक भारत कला भवन सभा का हिस्सा था। महात्मा गांधी ने कला भवन की सामग्री का अवलोकन सभा-परिसर में ही किया था। कला भवन के निदेशक श्रीरूप राय चौधरी ने घोषणा की कि प्रदर्शनी के लिए सभा भेजी गई चित्रकृतियां सभा को स्थायी रूप से भेंट की जा रही हैं。
उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शनी में बंगाल शैली के चित्रकार शैलेंद्रनाथ डे और रामगोपाल विजयवर्गीय जैसे असाधारण कलाकारों के अनमोल चित्रों के अलावा मुगल शैली के अनुपम चित्र भी शामिल हैं। कला भवन के उप निदेशक डॉ. Nishant ने बंगाल शैली और भारत कला भवन में उपलब्ध दुर्लभ साहित्यिक संपदा की विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर कुलपति ने काशी के मशहूर उपन्यासकार कुशवाहा कांत की जीवनी ‘काशी के कुशवाहा कांत’ का लोकार्पण किया। पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत हैं। इससे पूर्व आर्यभाषा पुस्तकालय परिसर में बीएचयू के कुलपति ने ‘प्रतिपदा’ कला दीर्घा और ‘पावस’ शीर्षक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। अतिथियों का स्वागत सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने किया।
संवाद के बाद निर्गुण का खास अंदाज
सायंकाल अन्य सत्र आरंभ हुए। संवाद सत्र में कमलेश किशोर सिंह ‘ताऊ’, आसिफ खां ‘खान चा’, कुलदीप मिश्र ‘सरदार’ और अतुल तिवारी ने युवाओं के प्रश्नों के उत्तर दिए। डॉ. हिमांशु बाजपेयी और डॉ. प्रज्ञा ने ‘काशी और कबीर’ विषय पर दास्तानगोई की। सांस्कृतिक सत्र में संस्कृति वाहने और प्रकृति वाहने ने क्रमश: सितार एवं संतूर पर यादगार जुगलबंदी की। उन्होंने वादन के लिए मौसम के अनुकूल राग का चयन किया। इस सत्र की अंतिम प्रस्तुति ‘द आह्वान प्रोजेक्ट’ के कलाकारों की रही। वेदी आह्वान, सुमंत बालाकृष्णन, मकरंद सनॉन, वरुण गुप्ता और प्रमेश ने खास अंदाज में निर्गुण गीतों की प्रस्तुति दी।
आयोजन में आज
18 जुलाई को शाम 5 बजे फिल्म-निर्देशक सुधीर मिश्र और अनुभव सिन्हा ‘सिनेमा और युवता’ विषय पर विशेष संवाद करेंगे। शाम 6 बजे सोहम गोराणे का स्वतंत्र तबला-वादन होगा। शाम 7 बजे प्रभाकर कश्यप एवं दिवाकर कश्यप शास्त्रीय गायन करेंगे। समापन सत्र में रात्रि 8 बजे प्रह्लाद सिंह टिपानिया एवं समूह का निर्गुण गायन होगा।
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