शनिवार को देव शयनी एकादशी रही। इसके साथ ही भगवान विष्णु चार माह के लिए विश्राम में चले गए और चातुर्मास आरंभ हो गया। सभी मांगलिक कार्यक्रम चार माह के लिए और बंद हो गए। हालांकि 15 जुलाई को बृहस्पति देव के अस्त हो जाने के बाद से मांगलिक कार्यक्रम बंद हैं। बृहस्पति देव तो 9 अगस्त को उदय हो जाएंगे। मगर चातुर्मास देवउठनी एकादशी यानि 20 नवंबर को संपन्न होगा। इसके बाद ही मांगलिक कार्य आरंभ हो सकेंगे। इस दौरान केवल अबूझ मुहूर्तों में ही कुछ मांगलिक कार्यक्रम हो सकेंगे। मगर विवाह न करना ही बेहतर रहेगा। देवशयनी एकादशी को लोग सुबह से ही स्नान आदि कर दान और भगवान विष्णु की आराधना में लगे रहे।
जो श्रद्धालु स्नान करने बृजघाट नहीं जा सके उन्होंने घर पर ही जल में गंगा जल मिलाकर स्नान किया। उन्होंने सत्यनारायण भगवान की कथा भी कराई। ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में सुंदरकांड का पाठ किया। इसके साथ भंडारा भी चलता रहा। पूजन पुजारी राम कुमार उपाध्याय ने कराया। गुंजन उपाध्याय, सरिता, ममता रानी, दीपिका राघव, विनीता आदि का सहयोग रहा। लाइन पार प्रकाश नगरा चौराहा, ताड़ीखाना चौक, मंडी चौक,बर्तन बाजार, कोर्ट रोड स्थित हठीले वाले वालाजी सहित शहर में कई स्थानों पर भंडारे किये गए।
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