Lucknow News: 15 मौतों वाले अवैध कॉम्प्लेक्स पर चला बुलडोजर, एलडीए ने जमींदोज किया भवन – Hindustan

Lucknow News: अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित उस अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को शनिवार को आखिरकार जमींदोज कर दिया गया, जहां 22 जून को लगी भीषण आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। नियमों की अनदेखी कर बनाए गए इस भवन पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने देर रात तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। खबर लिखे जाने तक इमारत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा ढहा दिया गया था। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए एहतियातन आसपास के मकान खाली करा लिए गए और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। एलडीए अधिकारियों के अनुसार, सेक्टर-डी स्थित भूखंड संख्या एमएस-102 पर केवल एकल आवासीय भवन का नक्शा पास था, लेकिन नियम दरकिनार कर यहां बहुमंजिला व्यावसायिक कॉम्प্লेक्स खड़ा कर दिया गया। हादसे के बाद शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट एक महीना बीत जाने के बाद भी सार्वजनिक नहीं हो सकी है।

हादसे के अगले दिन 23 जून को एलडीए ने भवन स्वामी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल और वीरेंद्र प्रसाद शुक्ल को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्वीकृत मानचित्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। वीरेंद्र शुक्ल को यह नोटिस जेल में तामील कराया गया। विहित न्यायालय ने 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश देते हुए मालिकों को 15 दिन में स्वयं निर्माण गिराने का निर्देश दिया था। निर्धारित समयसीमा 24 जुलाई को समाप्त हो गई, लेकिन भवन स्वामियों ने केवल करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ही तोड़ा था।

शनिवार सुबह एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा, जोनल अधिकारी माधवेश कुमार और रवि नंदन सिंह के नेतृत्व में टीम जेसीबी, पोकलेन व पंक्चर मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। इलाका सील कर आसपास के घर खाली कराए गए। ध्वस्तीकरण के दौरान भारी मशीनों के संचालन से आसपास के घरों में कंपन महसूस हुआ, हालांकि अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए स्थिति पर लगातार निगरानी रखी।

एलडीए की जांच सामने आया है कि वर्ष 2016 में भी इस भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, जिसे महज दो महीने बाद निरस्त कर दिया गया। शुरुआती जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी समेत प्रवर्तन जोन-4 के कई जोनल अधिकारियों, सहायक व अवर अभियंताओं की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही में शामिल अधिकारियों की सूची भी लंबी होती जा रही है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे और अवैध निर्माण के जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।

इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी भवन स्वामी अपनी चालबाजी से बाज नहीं आ रहा था। वह इतनी धीमी गति से काम करा था कि चार माह में भी निर्माण टूट नहीं पाता। साथ ही वह निर्माण के मलबा से बेसमेंट भी पटवा रहा था। शुक्रवार को एलडीए की टीम जब नाप-जोख के लिए पहुंची तो मलबे से बेसमेंट को पटता देख भवन स्वामी की चालबाजी समझ में आ गई। एलडीए में देर रात हुई बैठक में फोटो के साथ वास्तविक स्थिति उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार को दिखाई गई। इस चालबाजी पर बिल्डिंग को बिना देर किए ढहाने का फैसला लिया गया।

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