Nepal Flood Updates: बुधवार (26 अगस्त) की सुबह नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद अब एक और भीषण प्राकृतिक आपदा की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। चीन ने तिब्बत और नेपाल की सीमा पर छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी एक विशाल बैरियर झील के टूटने की गंभीर चेतावनी जारी की है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार सुबह तक झील में करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका था और यह अब लबालब भरने लगी है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और जुड़ सकता है, जिससे इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।
चीनी अधिकारियों ने गंभीर चेतावनी जारी की है कि अगले 72 घंटों के भीतर यह झील कभी भी टूट सकती है, जिससे निचले इलाकों में तबाही की दूसरी बड़ी लहर आ सकती है। लिहाजा, चीनी अधिकारी ड्रोन की मदद से मैपिंग कर रहे हैं और आपदा की तैयारी में जुटे हैं। चीनी रिपोर्ट में कहा गया है कि ये झील नेपाल के रसुवा ज़िले में भोटेकोशी नदी के उद्गम स्थल के पास बनी है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ये झील वहीं बनी है, जहां 26 अगस्त को भूस्खलन हुआ था और जिसके बाद बाढ़ आई थी, जिसकी वजह से नेपाल में अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1500 लोग लापता हैं।
बैरियर लेक (Barrier Lake) एक प्राकृतिक या कृत्रिम झील होती है, जो भूस्खलन, मलबे, हिमनद (ग्लेशियर) या बांध द्वारा किसी नदी या नाले का पानीरुकने से बनती है। हाल ही में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास (छोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर) भारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण एक खतरनाक और नई बैरियर झील बनी है, जिसके फटने का भारी जोखिम बना हुआ है। दरअसल, जब पहाड़ खिसकने या मलबा आने से नदी का रास्ता रुक जाता है, तो पीछे पानी इकट्ठा होकर झील का रूप ले लेता है। ऐसी झीलें कमजोर होती हैं और अतिरिक्त पानी या दबाव बढ़ने पर अचानक टूट जाती हैं। इससे झील के निचले हिस्से में अचानक भयंकर बाढ़ आ सकती है। ऐसी झीलों को डेथ लेक यानी मौत की झील भी कहा जाता है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार सुबह तक इस बैरियर झील में लगभग 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है और यह ओवरफ्लो होने लगी है। मौसम के पूर्वानुमानों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी और आ सकता है। इतनी बड़ी मात्रा में पानी आने से झील का प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा अत्यंत गंभीर हो गया है।
यह खतरनाक झील नेपाल के रसुवा जिले के ऊपरी हिस्से में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। ये दोनों नदियां तिब्बत से निकलती हैं और नेपाल में प्रवेश करने के बाद इन्हें भोटेकोशी नदी के नाम से जाना जाता है। भोटेकोशी आगे चलकर त्रिशूली नदी की मुख्य सहायक नदी बनती है। अगर यह बैरियर झील टूटती है, तो पानी का प्रचंड सैलाब सीधे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में बसे गांवों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तिनके की तरह बहा ले जाएगा।
इस नए संकट से पहले ही बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ ने इस सीमावर्ती क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में सड़कें, पुल, इमारतें और पनबिजली परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। हालांकि, चीनी हिस्से में भी इससे तबाही मची है। चीन की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि गियिरोंग पोर्ट (Gyirong Port) इलाके में ल्हेंदे नदी में आई मिट्टी और चट्टानों की बाढ़ के कारण 3 लोगों की मौत हुई है। तिब्बत क्षेत्र से 260 विदेशी नागरिकों सहित कुल 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
सैटेलाइट से प्राप्त शुरुआती तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि सोमवार और बुधवार के बीच इस सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के निशान मिले हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, ग्लेशियर की चट्टानों और बर्फ के टूटने से भारी मात्रा में सिस्मिक ऊर्जा पैदा हुई, जिससे भारी भूस्खलन हुआ और मलबे ने नदी के बहाव को पूरी तरह रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप इस ‘डेथ लेक’ का निर्माण हुआ।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देश पर प्रधानमंत्री ली कियांग खुद राहत कार्यों का नेतृत्व करने गियिरोंग टाउनशिप पहुंचे हैं। क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर-2 और स्थानीय स्तर पर स्तर-1 आपातकालीन प्रतिक्रिया को सक्रिय कर दिया गया है। चीनी सरकार ने तिब्बत के संवेदनशील गांवों को खाली करा लिया है और पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के हेलीकॉप्टर व आपदा दल राहत सामग्री पहुंचाने में जुट गए हैं।
उधर, नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (DHM) ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों, यात्रियों और खोजबीन दलों को नदी के किनारों से तुरंत दूर हटने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। हालांकि, नेपाल ने किसी भी विदेशी बचाव दल की मदद लेने से इनकार किया है और कहा है कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति से निपटने में सक्षम हैं।
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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