सबदलपुर में बच्चों ने रंगों से भारत के भविष्य की कहानी लिखी। कहीं रॉकेट ने उड़ान भरी, तो कहीं इलेक्ट्रिक कार दौड़ती दिखी। किसी चित्र में पानी बचाने का संदेश था, तो किसी में सौर ऊर्जा का महत्व बताया गया।
ये सिर्फ रंग नहीं थे, बल्कि आने वाले भारत की तस्वीर थी। कागज पर चलती बच्चों की पेंसिल और ब्रश की हर लकीर के साथ एक नया सपना बन रहा था। किसी चित्र में भारत अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू रहा था, तो किसी में प्रदूषण मुक्त सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे थे।
कहीं बूंद-बूंद पानी बचाने की अपील थी, तो कहीं सूर्य की ऊर्जा से आत्मनिर्भर भारत का सपना चमक रहा था। सबदलपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय में “मेरे सपनों का भारत” चित्रकला प्रतियोगिता हुई। इसमें बच्चों की कल्पना से विकसित भारत की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सबका ध्यान खींचा।
कार्यक्रम में मास्टर कुलदीप पुंडीर जी भी पहुंचे। उन्हें बच्चों की प्रतिभा और उनके विचारों को करीब से जानने का मौका मिला। नन्हे कलाकारों की चित्रकारी में रंगों से कहीं ज्यादा देश के भविष्य को लेकर उनकी सोच, जागरूकता और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया।
एक विद्यार्थी ने इलेक्ट्रिक कार बनाकर पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम करने का संदेश दिया। किसी ने जल जीवन मिशन, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन का महत्व अपनी कलाकृति में दिखाया। सौर ऊर्जा और नए ऊर्जा स्रोतों के चित्रों से साफ दिखा कि बच्चे पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा को भारत के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं।
ISRO, रॉकेट और चंद्रयान से जुड़े चित्रों ने प्रतियोगिता को खास बनाया। नन्ही आंखों में अंतरिक्ष का सपना और हाथों में भारत की वैज्ञानिक शक्ति की तस्वीर दिखाई दी। बच्चों की कल्पना धरती से निकलकर अंतरिक्ष तक पहुंचती नजर आई।
बच्चों से बात करने के दौरान उनकी जिज्ञासा और आत्मविश्वास ने भी प्रभावित किया। उनके विचारों में विकास, विज्ञान, पर्यावरण और राष्ट्र के भविष्य को लेकर एक साफ सोच दिखाई दी।
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