एलन मस्क के एआई चैटबॉट ग्रोक ने भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने पर राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता सहित चार बड़े जोखिम बताए हैं।
ग्रोक ने स्टारलिंक भारत सेवा पर उठाए सुरक्षा के सवाल (फाइल फोटो)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए अमेरिकी दिग्गज कारोबारी एलन मस्क जोर लगा रहे हैं, लेकिन अब उनकी ही कंपनी एक्सएआई के एआई चैटबाट ग्रोक ने भारत में इस सेवा को मंजूरी देने से जुड़े संभावित जोखिम गिना दिए हैं।
एक्स पर यूजर्स के सवाल के जवाब में ग्रोक ने राष्ट्रीय सुरक्षा, डाटा संप्रभुता, लागत और घरेलू टेलीकाम कंपनियों पर असर जैसी चिंताएं बताईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर मस्क को लेकर चुटकी ली जाने लगी। हालांकि, ग्रोक का जवाब एआई से तैयार सामग्री है, इसे मस्क या उनकी कंपनियों का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्टारलिंक को मंजूरी देने के संभावित नुकसान पूछे जाने पर ग्रोक ने चार प्रमुख चिंताएं बताईं। पहली, राष्ट्रीय सुरक्षा। उसके मुताबिक, विदेशी नियंत्रण वाले नेटवर्क पर निर्भरता से संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सेवाओं का संचालन और संकट के समय उनकी उपलब्धता भारत के लिए चुनौती बन सकती है। स्टारलिंक टर्मिनलों के गलत हाथों में पहुंचने की आशंका भी जताई गई।
दूसरी चिंता, डाटा संप्रभुता को लेकर थी। ग्रोक ने कहा कि उपग्रहों के बीच लेजर लिंक के जरिये डाटा भारतीय गेटवे से बाहर जा सकता है, जिससे निगरानी और कानूनी तौर पर डाटा तक पहुंच बनाने में मुश्किलें आ सकती हैं।
तीसरा मुद्दा, लागत का है। स्टारलिंक के उपकरण और मासिक शुल्क जियो तथा एयरटेल जैसी कंपनियों की सेवाओं के मुकाबले महंगे पड़ सकते हैं, जिससे आम लोगों के लिए इसका इस्तेमाल सीमित रह सकता है।
चौथी चिंता, घरेलू टेलीकाम कंपनियों पर असर और विदेशी सेवा प्रदाता पर निर्भरता बढ़ने की थी।भारत में सेवा शुरू करने की तैयारीस्टारलिंक का कहना है कि उसने भारत की सुरक्षा और डाटा संप्रभुता संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने कामकाज में बदलाव किए हैं।
कंपनी ने भारत में 20 से अधिक गेटवे साइट और सैकड़ों एंटीना होने की बात भी कही है। उसका दावा है कि सैटेलाइट इंटरनेट देश के मौजूदा टेलीकाम नेटवर्क का पूरक बन सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां पारंपरिक कनेक्टिविटी पहुंचाना कठिन है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में स्पेसएक्स की उपाध्यक्ष लारेन ड्रायर ने कहा था कि भारत जब तैयार होगा, स्टारलिंक सेवा देने के लिए तैयार रहेगा