चुनाव में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच 124 पूर्व IAS, IFS और अन्य सरकारी सेवाओं के अधिकारियों ने चुनाव आयोग का समर्थन किया है। इन अधिकारियों ने 10 अक्टूबर को जारी खुले पत्र में मतदाता सूची के SIR का बचाव किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में धांधली के आरोपों को विश्वसनीय सबूतों के आधार पर साबित किया जाना चाहिए। भारत की चुनाव व्यवस्था बूथ कब्जाने, मतपत्रों में गड़बड़ी और चुनावी हिंसा के दौर से काफी आगे निकल चुकी है। उन्होंने मतदान केंद्रों पर उम्मीदवारों के एजेंटों की मौजूदगी, EVM को सील करने, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और VVPAT से पर्चियों के सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को इसका आधार बताया।
पूर्व अधिकारियों ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का उदाहरण देते हुए दावा किया कि चुनाव में कहीं दोबारा मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी और 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। यह इलेक्शन मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था में हुए सुधारों को दिखाता है। पत्र में कहा गया कि किसी व्यवस्था को केवल इसलिए ईमानदार नहीं माना जा सकता कि उसमें जीत मिली और हारने पर उसी व्यवस्था को धांधली वाली बता दिया जाए। केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी इसी चुनाव आयोग के रहते कई राज्यों के चुनाव हार चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। अधिकारियों ने इन उदाहरणों के जरिए चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठाए और कहा कि चुनाव प्रक्रिया का आकलन तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
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पत्र में SIR को मतदाता सूची दुरुस्त रखने के लिए जरूरी प्रक्रिया बताया गया। इसके जरिए मृत मतदाताओं के नाम, एक से ज्यादा जगह दर्ज नाम और स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों की जानकारी की जांच की जाती है। पत्र में दावा किया गया कि बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान करीब 22 लाख मृत मतदाताओं और 7 लाख दोहरी एंट्री की पहचान की गई, जबकि लगभग 21.5 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। गलत मतदाता सूची के कारण फर्जी पहचान के आधार पर मतदान की आशंका पैदा हो सकती है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
पूर्व अधिकारियों की ओर से कहा गया कि SIR में गलत तरीके से नाम हटाए जाने की शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था मौजूद है। इसमें मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित करना, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका देना, सुनवाई करना और अपील की सुविधा शामिल है। इन प्रक्रियाओं का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे। चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाने वालों को उनके समर्थन में ऐसे सबूत देने चाहिए, जिनकी जांच की जा सके। उन्होंने मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराने और उच्च न्यायालयों में चुनाव याचिका दाखिल करने जैसे कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की।
पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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