वाराणसी के उदय प्रताप महाविद्यालय के हिंदी विभाग में सोमवार को प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह की जन्मशती पर दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। इसका विषय ‘हिंदी आलोचना का संवादी स्वर’ है। उद्घाटन सत्र में कवि मदन कश्यप ने कहा कि नामवर सिंह ने मार्क्सवादी आलोचना का जनवादी विस्तार किया। अध्यक्ष प्रो. अष्टभुजा शुक्ल ने उनकी परंपरा को असहमति और सहज संवाद की परंपरा बताया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने उन्हें बहुपठित आलोचक और प्रभावशाली वक्ता बताया। प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने उनके संवादी स्वर को नया आयाम कहा।
द्वितीय और तृतीय सत्र में डॉ. गया सिंह, प्रो. सदानंद शाही, प्रो. राजकुमार, प्रो. बलराज पांडेय, भालचंद्र जोशी, डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. रश्मि रावत ने नामवर सिंह के आलोचनात्मक विवेक और कथा साहित्य में योगदान पर विचार रखे।
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