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Bada Mangal 2025: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह के मंगलवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान हनुमान की भक्ति और पूजा के लिए समर्पित है।
इस वर्ष 2025 में ज्येष्ठ माह का चौथा बड़ा मंगल 3 जून को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह लेख चौथे बड़े मंगल के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालता है।
बड़ा मंगल का पर्व उत्तर भारत, विशेष रूप से लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यह दिन भक्तों के लिए विशेष फलदायी है, क्योंकि हनुमान जी की पूजा से नकारात्मक शक्तियों, दुर्घटनाओं और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। खासकर मंगल और शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन भंडारा और दान-पुण्य भी लोग करते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर चौथा बड़ा मंगल 3 जून 2025 को मनाया जा रहा है। अष्टमी तिथि 2 जून 2025 को रात 8:35 बजे से शुरू हुई थी और इसका समापन 3 जून 2025 को रात 9:56 बजे होगा। इस दिन धूमावती जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। इस दिन इन शुभ मुहुर्तों में पूजन कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 बजे से 4:43 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:38 बजे से 3:34 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:14 बजे से 7:35 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:40 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक) भी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल है।
बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा विधिवत करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या भगवा वस्त्र धारण करें, क्योंकि ये रंग हनुमान जी को प्रिय हैं। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद, चमेली के तेल या घी का दीपक जलाएं और हनुमान जी को लाल चोला, चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर, लाल पुष्प, तुलसी की माला, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
पूजा में गुलाब की माला चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। भोग के रूप में हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, काला चना, गुड़, नारियल या मीठा पान अर्पित करें। आप केले का भोग भी लगा सकते हैं, इसे बाद में बंदरों को खिलाया जा सकता है। इसके बाद, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें। इसके अलावा ‘ॐ हं हनुमते नमः’ मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इस दिन लाल वस्त्र, मसूर की दाल, गुड़ या ठंडी चीजों जैसे शरबत का दान करें। भंडारा आयोजित करना भी पुण्यदायी माना जाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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